मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे नगर पंचायत क्षेत्र के
बाशिंदों को यहां का प्रशासन पर्याप्त पेयजल भी मुहैया नहीं करा पा रहा है।
आलम यह है कि एक टंकी के सहारे दस हजार की आबादी किसी तरह अपना गुजारा कर
रही है। आज भी कागजी आंकड़ों में प्रति व्यक्ति को 15 लीटर पानी की खपत
बताते हुए आठ लीटर प्रति व्यक्ति को पेयजल विभाग पानी की सप्लाई दे पा रहा
है।
कसबे में लगे 40 हैंडपंपों में 25 हैंडपंप अर्से से खराब पड़े हैं,
जिनकी मरम्मत कराने की जहमत तक नहीं उठाई गई। नगर पंचायत की ओर से पेयजल
सप्लाई को तीन लाख रुपये की लागत की एक पानी की टंकी अर्से पहले बनवाई गई
थी, पर बिजली आपूर्ति खराब होने के कारण इस टंकी का भर पाना भी मुश्किल
होता है।
इसके चलते क्षेत्रीय जनता को पर्याप्त पेयजल मुहैया नहीं हो पा
रहा है। विभागीय दावों की माने तो क्षेत्र की जनता को आठ लीटर प्रति
व्यक्ति के अनुसार प्रति दिन पानी मुहैया कराया जाता है। हैरत की बात यह है
कि जिले की अन्य नगर पालिका और नगर पंचायतों में प्रति व्यक्ति पानी की
खपत 125 लीटर होती है, पर यहां के आंक ड़ों में आज भी एक व्यक्ति की पानी
की खपत 15 लीटर बताई जा रही है।
यही वजह है कि शासन स्तर से भी यहां
पानी की नई टंकी व नलकूप के लिए मंजूरी नहीं मिल पा रही। उधर, कसबे के दस
वार्डों में 40 हैंडपंप लगवाए गए थे। इनमें 25 हैंडपंप अर्से से खराब पडे़
हैं। इनकी मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। यही वजह है कि लोगों
को पेयजल के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उधर, पेयजल
व्यवस्था के लिए जल निगम द्वारा करीब दो साल पहले नलकूप लगाया गया था, पर
अभी तक वह हैंडओवर नहीं हुआ। इसके अलावा कसबे में पेयजल लाइन का प्रस्ताव
स्वीकृति के बाद ठंडे बस्ते में पड़ा है। वहीं एक ओवरहेड टैंक का प्रस्ताव
भी बजट के अभाव के नहीं बन सका।