हरदोई। पढ़ाई के नोट्स को लेकर छात्र की हत्या के 24 साल पुराने मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन योगेंद्र चौहान ने एक शख्स को दोषी करार दिया। अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतक के परिजन को देने के आदेश भी दिए।
शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के नगला भगवान निवासी रामरूप त्रिपाठी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 28 जुलाई 2001 को पत्नी ऊषा तिवारी, पुत्र चंद्र प्रकाश, गांव के ही मुरारी और रामचंद्र के साथ शाहाबाद जाने के लिए सुबह करीब आठ बजे रपटुआ तिराहे पर बस का इंतजार कर रहे थे।
इसी बीच पिहानी की ओर से प्राइवेट बस आई थी। बस में मझिला थाना व गांव निवासी विमलेश सिंह और उनके साथ एक बाल अपचारी बैठा था। आरोप था कि बस के अंदर घुसते ही दोनों ने चंद्रप्रकाश को पीटना शुरू कर दिया। मना करने पर दोनों ने तमंचे से फायर कर दिया। चंद्र प्रकाश के माथे पर एक गोली लगी थी जबकि दूसरी गोली मुरारी को लगी थी। गोली लगने से चंद्रप्रकाश की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद आरोपी भाग गए थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
विवेचना में पता चला था कि चंद्र प्रकाश 12वीं का छात्र था। शाहाबाद के एक विद्यालय में पढ़ता था। घटना के एक दिन पहले विमलेश के साथ नोट्स को लेकर बस में विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर अगले दिन घटना हुई थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था। विमलेश को जेल भेज दिया गया था। एक बालअपचारी होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया था। उसकी पत्रावली भी अलग कर दी गई थी। विमलेश की सुनवाई यहां न्यायालय में चल रही थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश किए गए। इसके साथ ही 21 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों की तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतो के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
आस में दुनिया छोड़ गए मां-बाप... अब मिल पाया इंसाफ
हरदोई। मां और पिता के सामने जरा सी बात पर छात्र की गोली मारकर हत्या की गई थी। 24 साल पहले हुई घटना में इंसाफ पाने को माता पिता कचहरी के चक्कर काटते रहे। उन्हें न्याय मिला, लेकिन इकलौते बेटे के हत्यारे को मिलने वाली सजा का एलान होने से कई साल पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के नगला भगवान निवासी रामरूप त्रिपाठी का पुत्र चंद्र प्रकाश छात्र था। परीक्षा के नोट्स को लेकर 27 जुलाई 2001 को उसका विवाद एक छात्र से ही हुआ था। छात्र ने अपने परिचित मझिला निवासी विमलेश सिंह के साथ 28 जुलाई को हत्या कर दी थी। विमलेश सिंह को इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। 175 पेशियों पर सुनवाई हुई। विमलेश को सजा तो हो गई, लेकिन अब से दस साल पहले रामरूप की और अब से पांच साल पहले ऊषा तिवारी की मौत हो चुकी है। चंद्र प्रकाश की हत्या में इंसाफ पाने की लड़ाई माता पिता के गुजर जाने के बाद उसकी बहनों ने लड़ी। चंद्र प्रकाश चार बहनों के बीच अकेला भाई था। एक बहन चंद्र प्रकाश से बड़ी थी, जबकि बाकी चार छोटी थीं।