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वनवास जा रहे राम को देख निषादराज भावुक

Sat, 07 Feb 2015 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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नुमाइश मैदान में मेला श्रीराम लीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में राम वन गमन की कई भावपूर्ण लीलाओं ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। वहीं श्रीराम के वन जाने से कई लोगों के जीवन का उद्धार भी हो गया। जिसमें निषादराज समेत केवट भी थे जो श्रीराम को नदी पार कराकर भव सागर से पार हो गया।
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कलाकारों नेे अपने अभिनय में श्रीराम द्वारा तमसा नदी के किनारे सभी को छोड़कर वन में आगे बढ़ने की लीला को दिखाया। वन में वह निषाद राज के क्षेत्र में पहुंचते हैं, जहां निषाद राज उनका स्वागत करते हैं और उनका आतिथ्य करते हैं। वहीं प्रभु श्रीराम अपने लिए वट वृक्ष का दूध मंगवाकर मुनि वेश धारण करते हैं।

निषाद राज उनको इस रूप में देखकर बेहद करुण हो जाते हैं। निषादराज से कहकर श्रीराम अपने लिए गंगा तट के दूसरी ओर जाने के लिए केवट को बुलाते हैं, जहां केवट श्रीराम को नदी पार उतारने को तो तैयार हो जाता है लेकिन वह उनके पैर धोने की जिद करता है।
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केवट कहता है कि आपके  मर्म को मैं जानता हूं आपके स्पर्श से पत्थर सुंदर स्त्री बन गई यदि मेरी नाव भी कहीं स्त्री बन गई तो मेरी रोजी रोटी चली जाएगी। इसलिए आप अपने चरण धोकर नाव पर पैर रखिए। इस प्रकार केवट प्रभु श्रीराम के चरण धोकर परिवार सहित उद्धार पा जाता है।

कलाकारों ने सशक्त अभिनय से सभी को प्रभावित कर दिया। इस दौरान आयोजक राम प्रकाश शुक्ला, कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, राकेश गुप्ता, संत कुमार सिंह व प्रेम शंकर द्विवेदी मौजूद थे।
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