हरदोई। कभी अपराधियों को पनाह देने के लिए बदनाम कटरी और यहां के बाशिंदे अब बदल रहे हैं। बाढ़ के कारण गंगा किनारे के जिन गांवों में कभी किसान फसल की बुवाई करने से परहेज करते थे, अब वहां जैविक खेती हो रही है। गर्व की बात यह है कि अपनी कटरी में उपजे जैविक अनाजों की मांग ऑनलाइन भी हो रही है। यहां के मक्के और बाजरे का आटा कई नामी कंपनियों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।
गंगा किनारे के चार विकास खंडों मल्लावां, सांडी, माधौगंज, बिलग्राम के 17 गांवों में जैविक खेती की जा रही है। स्टेबलिशमेंट ऑफ आर्गेनिक फार्म कलस्टर्स ऑन गंगा बेसिन इन यूपी (ईओएफसी) के तहत 17 कलस्टर बनाकर 466 किसानों ने जैविक खेती की शुरुआत की थी।
खास बात यह है कि कटरी के इलाके में उक्त परियोजना के तहत कराई गई करीब 340 हेक्टेयर की खेती पूरी तरह जैविक है। यहां जो भी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, उनमें कीटनाशकों या रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इन गांवों में मक्का, बाजरा, धान की फसलें तैयार की गई। इसके बाद मक्का और बाजरे का आटा भी तैयार कर यहीं पैकिंग की व्यवस्था भी की गई। सबसे अच्छी बात यह है कि कटरी में तैयार इन उत्पादों की मांग ऑनलाइन भी हो रही है। ये उत्पाद कई नामी कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
बाजार में भी खूब बिक रहे उत्पाद
उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्रा का दावा है कि कटरी के इलाके में तैयार किए गए मक्के और बाजरे के आटे की मांग ऑनलाइन सबसे ज्यादा है। इसके अलावा ये बाजारों में भी खूब बिक रहे हैं। पूरी तरह जैविक होने के कारण ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं।
हरदोई किसान नेचुरल एफपीओ हो गया पंजीकृत
कटरी में तैयार हो रहे उत्पादों का ब्रांड नेम नमामि गंगे उत्तरप्रदेश है। पीजीएस ग्रीन से प्रमाणित कृषि उत्पादों को बाजार में प्रस्तुत करने का कार्य हरदोई किसान नेचुरल फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी करेगी। इसके लिए पंजीकरण भी हो गया है। इससे पहले तक गंगा भूमि एफपीसी शाहजहांपुर के जरिये भी यहां के उत्पाद बेचे जाते थे। कटरी में तैयार होने वाले उत्पाद एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) में भी पंजीकृत हैं।
कटरी में दलहन की खेती की भी तैयारी
सूत्रों के मुताबिक कटरी के इलाके में इसी परियोजना के तहत दलहन की खेती करने की तैयारी हो रही है। 17 कलस्टर के उत्पादों को लेकर मिली सफलता से उत्साहित अधिकारियों ने अब जो योजना बनाई है, उसमें तीन हजार हेक्टेयर में जैविक खेती की जाएगी। इसमें उरद और मूंग की दाल के अलावा चने की दाल और हर्र की खेती किए जाने की योजना है। सब्जियाें का उत्पादन करने की भी योजना है।
बाजरे और मक्के का उत्पादन है अच्छा
उमेश चंद्र ने बताया कि कटरी में शुरू हुई योजना से फायदा मिला है। जैविक मक्का और बाजरा का उत्पादन भी अच्छा है। लोग इसके आटे की मांग भी कर रहे हैं। अधिकारी भी अक्सर देखने आते हैं।
जैविक खेती की शुरुआत में लगा था डर
शिवप्रसाद का कहना है कि शुरुआत में खेती करते डर लग रहा था, लेकिन फिर सोचा कि नुकसान तो कुछ होना नहीं। जब फसल तैयार हुई तो अच्छी थी और फिर यहीं आटा तैयार कराने के बाद पैकिंग भी हो गई।
सरकार जैविक खेती पर देती है अनुदान
यूपी डास्प के जिला समन्वयक डॉ. अखिलेश कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि उक्त परियोजना के तहत चयनित किसानों को खेती करने के लिए 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उपलब्ध कराया जाता है। बाजरा और मक्का के साथ ही सब्जी की भी खेती कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां के मक्का और बाजरा के आटे की सबसे ज्यादा डिमांड है।
शिवप्रसाद।- फोटो : HARDOI
जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए मेलों में लगते हैं ऐसे काउंटर। फाइल फोटो- फोटो : HARDOI