हरदोई। पाला पड़ने और तापमान में गिरावट से टमाटर और मिर्च की फसल में झुलसा रोग लगने लगा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि अगर फसल में रोग दिखे तो तत्काल दवाओं का छिड़काव करें।
जिले में इस साल किसानों ने लगभग साढ़े तीन हजार हेक्टेयर में टमाटर और करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मिर्च की खेती की है। अक्तूबर में बोई गई फसल लगभग तैयार हो गई है। इधर कुछ दिनों से तापमान गिरने और पाला पड़ने से टमाटर और मिर्च की फसलों में झुलसा रोग लगने लगा है।
झुलसा रोग ने 3 से साढ़े 3 सौ हेक्टेयर टमाटर और करीब 400 हेक्टयर रकबे में खड़ी मिर्च की फसल को चपेट में ले लिया है। सूचना मिलने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने रोगग्रस्त फसलों का निरीक्षण कर किसानों के माध्यम से खेतों में दवा का छिड़काव कराना शुरू कर दिया है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि झुलसा रोग तेजी से फसलों को प्रभावित करता है। यह पत्ती, तना और फल को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे फसल को 35 से 75 फीसदी तक नुकसान होता है, जो उपज होती भी वह भी दागी होती है। कहा कि किसान फसल की नियमित निगरानी करें, रोग लगने के प्रारंभिक दौर में ही दवा का छिड़काव करें।
रोग लगने पर करें इन दवाओं का छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम के मुताबिक पाला पड़ने से टमाटर और मिर्च की फसल में झुलसा रोग लगता है। रोग लगने पर पहले पत्तियां किनारे से सिकुड़ती हैं और इनका रंग भूरा होने लगता है। समय पर दवा का छिड़काव न किए जाने पर पत्तियां सिकुड़ कर ऊपर की ओर गोलाकार हो जाती हैं।
इसके बाद तने और अंत में फल पर भूरे रंग के खुरदुरे धब्बे आ जाते हैं। टमाटर व मिर्च की फसल में रोग लगने पर किसान, कीटनाशक फेमोक्सेडोर 16.5 प्रतिशत व साईमोक्सेनिल 22.1 प्रतिशत एससी की 6 सौ मिलीलीटर मात्रा को 200 लीटर पानी मिलाकर घोल तैयार करें और प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
इसके अलावा एजोक्सेस्ट्रोबिन 23 प्रतिशत एससी की 200 मिलीलीटर की मात्रा 200 लीटर पानी के साथ मिलाकर तैयार घोल अथवा कैप्टन 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 670 ग्राम दवा का 200 सौ लीटर मिलाकर घोल तैयार कर उसका प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं।
फोटो-21- कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम। संवाद- फोटो : HARDOI