जिला चिकित्सालय की पैथालॉजी में जांच करते कर्मचारी। संवाद
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हरदोई। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में रीजेंट न होने से किडनी व लीवर की जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी का रुख करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदारों को रीजेंट न होने की जानकारी ही नहीं है।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में पैथोलॉजी संचालित है। इसमें आधुनिक मशीनें भी हैं, लेकिन इसके बाद भी लीवर और किडनी की जांच के लिए आने वाले मरीजों को बैरंग जाना पड़ रहा है। दरअसल लीवर और किडनी की जांच के लिए रीजेंट की आवश्यकता होती है। पैथोलॉजी से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पिछले 15 दिन से रीजेंट ही नहीं है। औसतन हर रोज 70-80 मरीज लीवर और किडनी की जांच के लिए आते हैं, लेकिन जांच नहीं हो पा रही। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच के लिए जाना पड़ रहा है। यूं तो अस्पताल में सुविधाओं की देखरेख के लिए सीएमएस की तैनाती है, लेकिन उन्हें रीजेंट न होने के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
यह है रीजेंट
रीजेंट एक प्रकार का लिक्विड है। पैथोलॉजी के कर्मचारियों ने बताया कि रीजेंट लिक्विड को मरीजों के लिए रक्त के नमूने में मिलाया जाता है। इसके बाद रक्त के नमूनों को मशीनों में लगाया जाता है। जिससे संबंधित जांच का रिजल्ट मिलता है।
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि अगर रीजेंट नहीं था तो सीएमएस को अवगत कराना चाहिए था। अब संज्ञान में आया है तो जल्द रीजेंट की व्यवस्था कर पैथोलॉजी का सुचारु संचालन कराया जाएगा।
एचबीएवनसी की भी जांच बंद
जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में रीजेंट कमी का असर मरीजों की महत्वपूर्ण जांचों पर भी पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक शुगर के मरीजों का पिछले तीन माह का शुगर लेवल जांचने के लिए चिकित्सक की सलाह पर मरीज एचबीएवनसी की जांच कराते हैं। पिछले 15 दिनों से पैथोलॉजी में रीजेंट न होने एचबीएवनसी की जांच बंद हैं।