फोटो-27- मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
- मेडिकल कॉलेज में दवाओं की नहीं दूर हो रही कमी, मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ती महंगी दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के स्टॉक में लगातार दवाओं की कमी बनी हुई है। गंभीर बीमारियों की दवा मिलनी तो दूर, मामूली दर्द की दवा भी काउंटर पर उपलब्ध नहीं है। दर्द में इस्तेमाल होने वाला डीक्लो जेल मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। फंगल इंफेक्शन की दवा और आई ड्रॉप भी स्टॉक में नहीं हैं। सीरप के लिए भी मरीजों को मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है।
मौसमी बीमारियों के बढ़ने से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोज बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सक मरीजों को दवा लिख देते हैं। दवा लेने के लिए मरीज या उनके तीमारदार दवा वितरण काउंटर पर पहुंचते हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों को निराशा हाथ लगती है। मरीजों का कहना है कि काउंटर पर पर्चे में लिखी दवाओं में से एक-दो ही मिलती हैं। दर्द निवारक ट्यूब व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा सीएमसी आईड्राॅप, दर्द की दवा नेक्सडॉन, मोनटेलूकास्ट, प्राइमाक्वाइन के अलावा एलिटियाजोन, फलेक्सटाइन, बी-कॉमप्लेक्स सहित मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन, क्लोबसेव, इथिस्लोन व किमराल समेत कई महत्वपूर्ण दवाएं जो बाहर मेडिकल स्टोर पर 100 से 150 रुपये में मिलती है, वह मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर नहीं हैं।
मरीज बोले-बाहर से दवाएं लेने के लिए हैं मजबूर
फोटो- 29- रामचंद्र। संवाद
बावन ब्लॉक के धर्मपुर निवासी रामचंद्र ने बताया कि उन्होंने चिकित्सीय परामर्श के बाद दवा लेने आए थे। काउंटर पर तीन दवाएं तो मिल गई हैं, लेकिन एक दवा नहीं मिली है। काउंटर पर कहा गया कि यह दवा नहीं आ रही है, बाहर से लेनी पड़ेगी।
फोटो-30- शिवम। संवाद
केस-2- कोठरा निवासी शिवम ने बताया कि काउंटर पर छह दवाओं में से सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। जो दवा नहीं मिली वह निजी मेडिकल स्टोर से लेकर आए। अस्पताल में सस्ती दवाएं मिलती हैं, लेकिन बाहर से दवा लेने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मानक से आधी दवाओं की ही आपूर्ति
मेडिकल कॉलेज में 735 प्रकार की दवाओं का मानक तय है, लेकिन जिले में 340 प्रकार की दवाएं ही आती हैं उस पर भी प्रबंधन दवाएं पूरी नहीं कर पा रहा है। इनमें से 24 प्रकार की टैबलेट नहीं हैं और सिरप भी नहीं आ रहे है। इसी तरह 15 प्रकार के कैप्सूल सहित कई इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि मौसमी बीमारियों के अलावा भी लगभग वर्षभर दवाओं की उपलब्धता की यही स्थिति रहती है। शासन को लगातार डिमांड भेजने के बाद भी पूरी दवाएं नहीं मिलती हैं।
वर्जन
दवाओं की कमी को पूरा करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, बजट मिलने के बाद दवाएं भी मंगवाई गई हैं। मौसम में बदलाव के चलते मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। ऐसे में दवाओं की अनुपलब्धता बनी रहती है। शासन से लगातार बात कर दवाओं की कमी दूर करने की कोशिश हो रही है।-डॉ. चंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक