जीवन का बेड़ा पार लगाने वाला गुरु होता है, इसमें
कोई दो राय नहीं। यदि इसी सद्गुरु के रूप में किसी को हनुमान मिल जाएं तो
जीवन में कोई चाहत शेष नहीं रह जाती। पूरा का पूरा जीवन वहीं से धन्य हो
जाता है।
राम जानकी मंदिर परिसर में चल रही श्रीरामकथा में अंतिम दिन
शुक्रवार को कथा व्यास संतोष भाई ने अमृत वर्षा के दौरान कही। उन्होंने कथा
के अंतिम दिन भगवान राम के वानर भालु सुग्रीव की सेना के साथ मिलन व लंका
विजय के प्रसंगों का वर्णन किया।
संतोष भाई ने हमेशा की तरह अबकी भी
भक्तों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब बड़ी ही सहजता से दिया। किसी ने
जीवन के सत्य की जानकारी चाही तो किसी ने अंतिम सत्य के
बारे में अपनी उलझनों को उनके समक्ष रखा, जिसके बाद बारी-बारी से उन्होंने
सभी भक्तों के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी माथों की शिकन को दूर करने का
सफल प्रयास किया।
इस मौके पर राकेश अग्रवाल, सोमेंद्र अग्रवाल, राजेंद्र
पटेल, दिलीप गुप्ता, अपूर्व महेश्वरी, विजय सिंह, अनूप पुरी, गिरीश
डिडवानिया आदि मौजूद थे। उधर, महाराज सिंह पार्क में आचार्य श्रीराम जी भाई
ने कहा कि दुष्टों का आतंक जब असहनीय हो जाता है, तब धर्मध्वज प्रभु अवतार
लेते हैं।
मनुष्य के अंदर जब राक्षसत्व ज्यादा बढ़ने लगता है तो उसके अंदर
भी एक दिन राम जन्म होता है। कहा कि दसों दिशाओं में निर्भीक भ्रमण करने
वाला मन दशरथ है। यहां दशरथ और दशानन का द्वंद्व है। कहा कि अहं से बचने को
भक्ति, विनीता, प्रेम, करुणा, सत्य आदि आठ आचरण बताए गए हैं।
उन्होंने
सद्मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि मन में प्रभु श्रीराम का चिंतन
करने से मनुष्य का उद्धार हो जाता है। इस मौके पर कई लोग मौजूद थे।