बावन। पिछले पांच दिनों से लगातार बाघ जिले के वन विभाग की टीमों को पस्त कर आगे बढ़ता जा रहा है और विभाग को सिर्फ पंजे के निशान के अलावा और कुछ हासिल नहीं हो रहा। बुधवार को सांडी क्षेत्र के संगैचामऊ में उसकी फोटो कैद करने के लिए नाइट विजन कैमरे लगाए गए तो वह एक ही रात में बावन तक पहुंच गया। गुरुवार को भी सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम बावन के भुवनपुरवा के आसपास के गांवों में पंजे के निशान मिलने पर कांबिंग में जुटी रही।
हरदोई वन रेंज की सीमा के तहत लोनार कोतवाली क्षेत्र के गांव भुवनपुरवा के खेतों में पंजे के निशान मिलने की सूचना से ग्रामीणों में गुरुवार सुबह दहशत फैल गई। भुवनपुरवा और मढिया के किसानों ने बताया कि गुरुवार सुबह जब किसान अपने खेतों में गए तो बाघ के पंजों के निशान बने देखे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे डीएफओ विमल कुमार आनंद और रेंज अधिकारी रत्नेश श्रीवास्तव ने वन्य जीव विशेषज्ञों की टीम के साथ खेतों में बाघ के पंजों को पहचाना और निशानों की माप ली।
डीएफओ ने बताया कि बाघ भटका हुआ है जो कि अपने लिए सुरक्षित प्राकृतिक स्थान ढूंढ रहा है। सांडी क्षेत्र के संगैचामऊ में नाइट विजन कैमरा लगाए गए हैं। भुवनपुरवा गांव में पंजों के निशान मिले हैं। संभवत: बाघ खेतों-खेतों चलते हुए शाहाबाद रेंज में पहुंच कर शाहजहांपुर की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों को सावधान रहकर सूचना विभागीय अधिकारियों को देनी चाहिए।
रेंज अधिकारी ने बताया कि पंजे के निशान नर बाघ के हैं। इसकी लंबाई करीब 8 फीट और वजन करीब डेढ़ क्विंटल होता है। ये रात में चलता है और दिन में सुरक्षित प्राकृतिक स्थान पर आराम करता है। कांबिंग के दौरान खेतों में ग्रामीणों का जमावड़ा लगा रहा। इस दौरान वन दरोगा रामपलट, देवेंद्र कुमार यादव, वैभव त्रिपाठी, विपुल कुमार शुक्ला, शिव मिलन शुक्ला, सुनील कुमार आदि वनकर्मी और वन्य जीव विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही।
वन रेंज अधिकारी ने बताया कि सांडी क्षेत्र के संगैचामऊ में लगवाए गए कैमरों को खुलवा लिया गया है। अभी जब तक इसकी लोकेशन का सही पता नहीं लग जाता तब तक कैमरे नहीं लगवाए जाएंगे। उसका एक जगह स्थिर होना जरूरी है। निश्चित तौर पर पांच दिन व रात से बाघ जिले में हैं। उसके विचरण करने की स्थितियां तो पता चल रहीं लेकिन किसी को घायल करने या मवेशी आदि को मारने की कोई सूचना अब तक नहीं है। जिसको देखकर वन विभाग के कर्मी यह कहने से नहीं थकते कि शांत प्रकृति का है बाघ, यही राहत है। इसी स्पीड से यदि बाघ चलता रहा तो वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार वह शाहाबाद क्षेत्र के बाद शाहजहांपुर या फिर लखीमपुर सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा। कहीं न कहीं वन विभाग के अधिकारी व कर्मी इसी का इंतजार भी कर रहे हैं।
डीएफओ का कहना है कि यह सभी के लिए अच्छी बात है कि यह बाघ आबादी से दूरी बनाकर चल रहा है। किसी के लिए खतरा नहीं बन रहा है। आबादी की हलचल देखकर ही वह दूरी बना लेता है। कुछ बाघ की प्रवृत्ति होती है कि वह आबादी में घुसते हैं। वह सभी के लिए खतरनाक साबित होते हैं लेकिन अभी तक इस बाघ की प्रवृत्ति शालीन ही रही है जो सभी के लिए राहत भरी है।