- चारा-दाना, पानी और साफ-सफाई की जिम्मेदारी चयनित संस्था की होगी
- शासन स्तर से चयनित पशु आश्रयस्थल के लिए तय किए गए एनजीओ
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। संरक्षित निराश्रित मवेशियों के भरण-पोषण, चारा-दाना, पानी और पशु आश्रयस्थल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी नॉन गवर्मेंट आर्गेनाइजेशन (एनजीओ) को सौंपी जाएगी। हरदोई के 20 सहित लखनऊ मंडल के 135 पशु आश्रयस्थल को एनजीओ को दिए जाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए संचालित पशु आश्रयस्थल का संचालन अभी पंचायत के माध्यम से कराया जा रहा है। शासन ने इनका संचालन एनजीओ को सौंपने का निर्णय लिया है। प्रदेश स्तर पर 707 पशु आश्रयस्थलों की एनजीओ को जिम्मेदारी दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें लखनऊ मंडल के 135 पशु आश्रयस्थल शामिल हैं। हरदोई के 20, लखनऊ के आठ, सीतापुर के 41, उन्नाव के 21, रायबरेली के 32 और लखीमपुर के 13 पशु आश्रयस्थल शामिल हैं।
एनजीओ को दिए जाने के बाद मवेशियों की संख्या के आधार पर प्रति मवेशी प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से भरण-पोषण भत्ता भी एनजीओ को ही दिया जाएगा। वहीं मवेशियों के स्वास्थ्य में सुधार न होने और देखरेख में लापरवाही पर एनजीओ की ही जवाबदेही तय की जाएगी।
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अमिरता पशु आश्रयस्थल का संचालन संभाल रहा एनजीओ
जिले में वैसे तो 324 पशु आश्रयस्थल हैं। इसमें अभी तक विकास खंड भरखनी के अमिरता के पशु आश्रयस्थल का संचालन एनजीओ को सौंपा गया है। अमिरता पशु आश्रयस्थल को स्मृति समाज सेवा संस्थान सवायजपुर को जिम्मेदारी मिली है। अमिरता पशु आश्रयस्थल में करीब 1,500 मवेशी संरक्षित हैं। सीवीओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एनजीओ के अभिलेखों के सत्यापन के बाद प्रक्रिया पूरी कराते हुए पशु आश्रयस्थल दिए जाने की औपचारिता भी पूरी करा ली गई है।
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शासन स्तर पर पशु आश्रयस्थलों के संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। निदेशक पशुपालन की तरफ से प्रदेश के 707 पशु आश्रयस्थलों को एनजीओ को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें लखनऊ मंडल के 135 और हरदोई के 20 एनजीओ शामिल हैं। निदेशक ने चिह्नित पशु आश्रयस्थलों के साथ ही एनजीओ का भी चयन कर लिया है। अब शासन स्तर से प्रक्रिया पूरी होते ही एनजीओ को पशु आश्रयस्थल सौंपे जाएंगे।
- डॉ. अशोक कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी