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पौराणिक अतीत को अपने आंचल में समेटे श्रवण देवी मंदिर

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हरदोई। सिद्धपीठ श्रवण देवी मंदिर भक्तों व श्रद्धालुओं के लिए विशेष तौर पर आस्था का केंद्र है। नवरात्र में इस मंदिर की महिमा और भी बढ़ जाती है। यह मंदिर शहर से दो किलोमीटर दूर सांडी रोड पर स्थित है। मंदिर का पौराणिक इतिहास भगवान शिव व सती की कथा से जुड़ा है।
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पुजारी रामविलास बताते हैं कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब विष्णु ने अपने चक्र से सती के अंग काटे तो यहां पर सती का कर्ण भाग गिरा था। बताया जाता है कि यहां एक पीपल का एक प्राचीन वृक्ष था जिसकी खोह में श्रवण देवी जी की प्राचीन लाल पत्थर की मूर्ति प्राप्त हुई थी। उस समय पीपल के वृक्ष में स्वयं देवी-देवताओं की आकृतियां बनती बिगड़ती रहती थीं।
यह वृक्ष लगभग एक दशक पूर्व गिर चुका है। मंदिर लगभग 137 वर्ष पुराना है। स्थल का विकास सन 1880 में सेठ सामालिया प्रसाद के द्वारा कराया गया। बताया जाता है कि जब देवी जी उनके स्वप्न में आई तो इस मंदिर का विकास और ज्यादा करवाया गया। सिद्ध पीठ मंदिर के बारे में कहा जाता है कि नवरात्र में ही नहीं बल्कि 12 मास यहां पर अपनी मनोकामना लेकर आने वाला मां का आशीर्वाद लेकर ही जाता है। उनकी हर कामना पूरी होती है।
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हरदोई। पुजारी रामविलास ने बताया कि मंदिर में मां श्रवण देवी की कई सालों पुरानी मूर्ति स्थापित है, इसके अलावा यहां पर विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाओं को भी स्थापित किया गया है। इसके लिए श्रवण देवी के मंदिर के आस-पास कई छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। इसके अलावा यहां पर एक विशाल यज्ञशाला भी बनी हुई है, जहां पर आषाढ़ में भव्य यज्ञ का आयोजन किया जाता है। मंदिर के परिसर में प्रहलाद कुंड भी बना हुआ है जो यहां का आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां पर पहुंच कर भक्त आचमन लेते हैं। शारदीय नवरात्र में शतचंडी यज्ञ का वृहद आयोजन किया जाता है। यहां पर स्थापित मूर्तियां प्राचीन कलाओं को प्रदर्शित करती हैं।
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