हरदोई। करीब 11 माह बाद एक बार फिर नौनिहालों के प्रवेश के बाद जिले के जूनियर स्कूल 10 फरवरी से गुलजार होते नजर आएंगे। छात्र-छात्राओं को लेकर जिले के स्कूलों में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। कहीं सीटों को व्यवस्थित करने की कार्रवाई होती दिखी तो कहीं स्कूलों को सैनिटाइज किया जाता देखा गया।
अरे जल्दी करो, अब तो बच्चे आ रहे
बच्चों के स्कूल पहुंचने की खुशी नौनिहालों को ही नहीं बल्कि स्कूल के शिक्षक समेत अन्य स्टाफ को भी है। सोमवार की दोपहर कन्या जूनियर हाईस्कूल रेलवेगंज में भी तैयारियों का दौर देखा गया।
प्रधानाध्यापिका अनुपम पांडे स्कूल के अन्य स्टाफ के साथ कक्षाओं में सीटों को व्यवस्थित करा रहीं थीं। उन्होंने बताया कि 50 फीसदी बच्चों को बुलाने एवं छह फीट की दूरी व्यवस्थित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि बच्चे आए तो किसी को परेशानी न हो।
प्रत्येक स्कूल में दिखने लगे हैंडवाशिंग सिस्टम
कोरोना काल में ही प्रत्येक विद्यालय में कंपोजिट ग्रांट द्वारा निर्मित मल्टीपल हैंडवाशिंग सिस्टम की अनिवार्यता पर जोर दिया गया है जिसको काफी हद तक विद्यालयों में पूरा भी किया गया है।
शहर के कई विद्यालयों में पानी की एक टंकी के साथ एक सिस्टम लागू होते पाया गया। शिक्षकों का कहना था कि स्कूल में बच्चे आते ही समय समय पर हाथ धुलाने की आदत उनमें और अच्छी तरह से डाली जाएगी।
नियमों के साथ बच्चे पहुंचेंगे स्कूल : बीएसए
बीएसए हेमंत राव ने बताया कि कक्षा छह से आठ तक के विद्यालय 10 फरवरी से एवं कक्षा एक से पांच तक के विद्यालय एक मार्च से खुलेंगे। इसको लेकर शासन ने गाइडलाइन भी जारी की है।
उनका पालन स्कूलों में अवश्य किया जाए। इसके अलावा शिक्षा विभाग के अधिकारी व आला अधिकारी भी इस ओर स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखेंगे। जिले में कक्षा छह से आठ तक के 1032 परिषदीय हाईस्कूल व 958 मान्यता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल हैं।
इन नियमों का कराया जाएगा पालन
शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से जिले के शिक्षा विभाग को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें बताया कि 10 फरवरी से परिषदीय स्कूलों में बच्चों को बुलाया जा रहा है, लेकिन इस बीच विद्यालय प्रबंधन को लापरवाह नहीं होना है। बल्कि और एहतियात बरती जानी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि गाइडलाइन के अनुसार छात्र-छात्राओं के बीच कम से कम छह फीट की दूरी होनी चाहिए। इसी प्रकार शिक्षक के स्टाफ रूम, कार्यालय व आगत कक्ष में भी छह फीट की दूरी पर बैठने की व्यवस्था की जाए। प्रत्येक दिन ऐसी व्यवस्था की जाए कि कुल क्षमता के पचास फीसदी बच्चों को ही बुलाया जाए।
प्राथमिक स्तर सोमवार व वृहस्पतिवार को कक्षा एक व पांच, मंगलवार व शुक्रवार को कक्षा दो व चार, बुधवार व शनिवार को कक्षा तीन के बच्चों को बुलाया जाए। इसी तरह उच्च प्राथमिक स्तर पर सोमवार व बृहस्पतिवार को कक्षा छह, मंगलवार व शुक्रवार को कक्षा सात एवं बुधवार व शनिवार को कक्षा आठ के बच्चों को बुलाया जाए। उनके द्वारा यह भी निर्देशित किया गया कि जिन कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या सीमित है वहां पर दो-दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जाएं।