हरदोई। कुदरत की मार से बेहाल किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। खेती के लिए बनवाए गए किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए लोन का ब्याज भरने के लिए किसान लोन का रिन्यूवल बैंक से करवाकर ब्याज जमा कर रहा है। किसानों की मानें तो कम बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी खेत में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया। वहीं, इस बार रबी की फसल में गेहूं के उत्पादन में गिरावट आने से उसके सपने टूटते नजर आ रहे हैं। पेश है कुछ किसानों की पीड़ा पर आधारित रिपोर्ट-
हरपालपुर विकास खंड के सतौथा गांव निवासी कल्लू वाजपेयी ने आठ बीघा खेती पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। उसने गत वर्ष एक लाख रुपये का लोन आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की शाखा से लिया था। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई। नतीजतन वह ऋण का ब्याज भी अदा न कर सका। उसने बताया कि बैंक से लगातार मिल रही नोटिस के बाद उसने लोन का रिन्यूवल करवाकर ब्याज भरा। इस बार भी गेहूं के उत्पादन में आई गिरावट ने सपने तोड़ दिए।
हरपालपुर ब्लाक क्षेत्र के सतौथा गांव निवासी कुसुमाकर ने बताया कि छह बीघा खेत पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर 60 हजार रुपये का ऋण आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से लिया था। फसल खराब होने से ऋण समय पर अदा नहीं कर सका। नतीजतन बैंक ने ऋण का रिन्यूवल कर ब्याज के रुपये काट लिए। सरकार से मिलने वाला मुआवजा भी अभी तक नहीं मिला।
हरपालपुर ब्लाक क्षेत्र के सतौथा गांव निवासी उमेश ने पांच बीघा खेत पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की शाखा से 50 हजार रुपये का लोन रबी की फसल के लिए लिया था। इस बार तैयार फसल में गेहूं पतला हो गया। फसल से लागत भी निकलती नजर नहीं आ रही है। बैंक के ऋण को अदा करने के लिए परेशान है।
हरपालपुर ब्लाक क्षेत्र के सतौथा गांव निवासी कौशल कुशवाहा ने 12 बीघा खेत पर किसान क्रेडिट कार्ड आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से बनवाया था। उसने पिछले वर्ष 80 हजार रुपये का ऋण लिया, लेकिन फसल खराब होने के कारण समय से ब्याज भी अदा न कर सका। बैंक से मिल रही नोटिस के कारण लोन का रिन्यूवल कराकर ब्याज व किस्त अदा की।
हरपालपुर ब्लाक क्षेत्र के सतौथा गांव निवासी बाबू दीक्षित का कहना है कि क्षेत्र में गिरते जलस्तर और कुदरत की मार से दो सालों से फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है। 12 बीघा खेत पर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से बनवाए गए किसान क्रेडिट कार्ड से 80 हजार का ऋण भी चुकता नहीं कर पा रहा हूं। दैवी आपदा से मिलने वाली राहत चेक भी नहीं मिल पाई है। जिस कारण परिवार का भरण पोषण भी भारी पड़ रहा है।
बेहंदर ब्लाक के सरेहरी गांव निवासी पिरथीपाल ने एक बीघा खेत पर बैंक आफ इंडिया की स्थानीय शाखा से एक लाख रुपये का ऋण बेटी की शादी के लिए गत वर्ष लिया था। पिछले वर्ष सूखा पड़ने के कारण नुकसान उठाना पड़ा। सूखा राहत चेक भी अभी तक नहीं मिल पाई है। फसल खराब होने के कारण ऋण की किस्त अदा नहीं कर करने पर बैंक लगातार नोटिस भेज रहे हैं। बैंक के मैनेजर ने भी चेतावनी दी है।
शासन से जिले में मिले सूखा राहत बजट की धनराशि का तहसील स्तर पर आवंटन होने की जानकारी मिली है। अभी तक जो बजट मिला उसका आवंटन कर दिया गया। शेष किसानों को बजट आने पर सहायता राशि दी जाएगी।- विवेक वार्ष्णेय, जिलाधिकारी