वर न मागूं दूजो, मेरी उम्र भी लगा दें मेरी पति
को...किसी फिल्म का यह गीत बरबस ही आज सुहागिनों की जुबान पर वट वृक्ष के
पूजन के समय आ गया। ऐसी ही कामना करते हुए सुहागिनों ने वट अमावस्या के
अवसर पर वट वृक्ष का पूजन किया।
जेठ माह में पड़ने वाली वट अमावस्या
के दिन व्रत रखने का सुहागिन महिलाओं को पूरे वर्ष इंतजार रहता है। करवा
चौथ की तरह इस पर्व पर भी महिलाएं पति की लंबी उम्र और सलामती की कामना कर
व्रत रख पूजन पाठ करती हैं। पौराणिक कथा जिसमें सावित्री ने बरगद वृक्ष के
नीचे पूजन कर अपने सुहाग की कामना की थी।
उसी मान्यता को लेकर सुहागिन
महिलाएं इस तिथि को वट सावित्री व्रत के नाम से पूजन करती चली आ रही हैं और
सत्यवान की तरह अपने अटल सुहाग की कामना करती है। खासकर इस व्रत का
नवविवाहिताओं को काफी प्रतीक्षा रहती है।
उसी परंपराओं के अनुसार सोमवार को
वट अमावस्या पर सुहागिन महिलाओं ने धूमधाम से वट सावित्री व्रत कर पूजन
किया। इस दौरान सुबह से ही बरगद के वृक्षों के पास सुहागिनों की भीड़
जमा होने लगी, जिनके घर के पास वृक्ष थे उन्होंने वहां पूजा की, लेकिन
जिन्हें नजदीक वृक्ष नहीं मिले उन्होंने काफी दूर जाकर पूजन किया।
सोलह
श्रंगार कर सुहागिन महिलाओं ने परिवार की महिलाओं के साथ पूजन किया।
मान्यता के अनुसार पूजन में खरबूजा का विशेष महत्व होता है। जिसके चलते
खरबूजे की मांग अधिक रही। पूजन थाली लेकर महिलाओं ने वट वृक्ष का पूजन कर
फेरे लिए। घर जाकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।
कुल मिलाकर वट
सावित्री व्रत का दिन रविवार पूरी तरह से परंपराओं व आस्था के नाम रहा। हर
घर में यह पर्व पूरी श्रद्धा व उत्साह के बीच मनाया गया।