धर्म आधारित जनगणना रिपोर्ट जारी होते ही राजनीतिक
गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गईं। गांव के चबूतरों और चौपालों पर बैठकर
प्रधान पद के संभावित दावेदार गुणा-भाग करने लगे हैं।
जिले की कुल
आबादी में साढ़े 13 फीसदी मुसलमान हैं, यानी 40 लाख 92845 लोगों में पांच
लाख 56249 मुसलमान हैं। कई इलाके ऐसे हैं जहां मुस्लिम बड़ी तादाद में हैं।
चुनाव में इनकी अहम भूमिका होगी।
धर्म आधारित जनगणना रिपोर्ट जारी
होने के बाद जिले की ग्रामीण राजनीति में भी आंकड़ों की सियासत तेज हो गई।
राजनैतिक पार्टियों से लेकर गांव के गलियारों तक में इस पंचायत चुनाव
महासंग्राम की तस्वीर देखी जाने लगी है। गांव की हिंदू-मुस्लिम आबादी को
लेकर प्रधान पद के संभावित दावेदार रणनीति बनाने लगे हैं।
राजनीति
के जानकारों का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मुस्लिम वोटों को
दरकिनार नहीं किया जा सकता। जिले की कुल 40 लाख 92845 है। इसमें साढ़े 13
फीसदी यानी पांच लाख 56249 मुस्लिम आबादी है। सबसे अधिक मुस्लिम आबादी
शाहाबाद क्षेत्र में है।
यहां की कुल आबादी सात लाख 61000 में करीब
एक लाख 57693 मुसलमान हैं। दूसरे नंबर पर बिलग्राम इलाका है। यहां की छह
लाख 65000 आबादी में एक लाख 7716 मुस्लिम आबादी है। तीसरे नंबर पर हरदोई
शहर है। यहां की 1086084 आबादी में 107243 मुसलमान हैं।
इन इलाकों
में मुस्लिमों की भूमिका तो अहम होगी ही, इसके अलावा भी कई ऐसे इलाके हैं,
जहां इनकी निर्णायक भूमिका होगी। बहरहाल धर्म के आधार पर जनसंख्या घोषित
होने के बाद दावेदार रामजुहार करने में जुट गए हैं।
वर्ष 2001 की
जनगणना में 19 ब्लाकों वाले इस जिले की कुल आबादी 33 लाख 98306 थी। हालांकि
वर्ष 2001 जनगणना में धर्म के आधार पर कोई आंकड़े जारी नहीं किए गए थे।
वर्ष
2002 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रशासनिक तौर पर तैयार की गई रिपोर्ट
में जिले में कुल आबादी का 10.66 फीसदी मुसलमान बताए गए थे, जो 2011 की
जनसंख्या में बढ़कर साढ़े 13 फीसदी हो हो गए। वर्ष 2001 में मुसलमानों की
आबादी 4,41779 थी, जो 2011 में बढ़कर 556249 हो गई है।