हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या पर मंगलवार को भूरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लखनऊ से आए कवि शैलेन्द्र सिंह ने मां की आराधना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। उन्होंने मां की आंखों से ओझल न होऊं कभी...कविता पढ़ी।
उन्नाव से आए केडी शर्मा हाहाकारी जीवनशैली से हास्य से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हरदोई के शोभित सिंह तोमर मां थी मैं अब रह गई केवल तुम्हारी आय हूं, बेटों के होते कट रही मैं अभागी गाय हूं और हरदोई के श्याम त्रिवेदी पंकज ने कर्णधार ही निकल पड़े जब कदम बढ़ाने की खातिर, ऐसी औलादों से ज्यादा कोख बांझ हो तो अच्छा है कविता का खूब दाद मिली। स्वदेश शुक्ल ने बिना मेहरिया के रहो, या फिर बेचो चाय, सत्ता पाने का यही सबसे सरल उपाय कविता सबसे ज्यादा तालियां बटोरी।
बदायूं के अभिषेक अनंत ने दिया जन्म तो पालो बाबू जी, मुझे नाले में न डालो बाबू जी पंक्तियों से कन्या भ्रूण हत्या करने वालों को आइना दिखाया। विजय तनहा ने ख्वाबों में रहती सदा आकर ट्वेंटी फोर, वादे पर आती नहीं रहती है अपसेंट कविता पढ़ी। उन्नाव के विश्वनाथ, जेबीगंज के सुनीत वाजपेयी, अजीत शुक्ल ने भी काव्य पाठ किया।
अध्यक्षता आलोक अवस्थी और संचालक संतोष सिंह ने किया। पूर्व विधायक अनिल वर्मा, भाजपा नेता राजा बख्श सिंह, गौरव भदौरिया, राजन सिंह, अवधेश रस्तोगी, बाल कृष्ण गुप्ता, नवनीत वाजपेयी, विमलेश गुप्ता, डॉ. मुजाबिर हुसैन जैदी, डॉ. रहमत अली और दिनेश लोहिया आदि मौजूद रहे।