जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर कटरा-बिल्हौर हाईवे
पर स्थित ग्राम सभा मुंडेर के किसानों की तस्वीर और तकदीर इस समय कुछ और
बयां कर रही है। सवर्ण बाहुल्य इस गांव में रोजी-रोटी का एक मात्र जरिया
खेतीबाड़ी ही है। गांव में पहुंचते ही नारायण प्रसाद दीक्षित ने मुलाकात
हुई। खेती किसानी के बारे में पूछा तो उनकी आंखें भर आईं और बोले उनके पास
छह बीघा जमीन है, वहीं करीब 25 बीघा जमीन आधी बंटाई पर ली थी।
बोले,
महाजन से कर्ज लेकर फसल में लागत लगाई। खरीफ की फसल सूखा पड़ने से बर्बाद
हो गई, लेकिन इस बार किस्मत फिर दगा दे गई और रबी की फसल पर पानी फिर गया।
बताया कि परिवार में 17 लोगों का भरण पोषण इसी खेती से होता है। बोले,
बिटिया की शादी तय कर दी थी, लेकिन फसल की बर्बादी से शादी आगे के लिए टाल
दी।
अब परिवार के आगे दो जून की रोटी की भी किल्लत है। ऐेसे में महाजनी का
कर्ज अदा करना उनके लिए चुनौती बन गई है। उन्होंने अपने चारों बेटाें को
मेहनत मजदूरी के लिए दिल्ली भेज दिया है और अब उनकी कमाई से ही रोटी की
उम्मीद बंधी है। गांव के अयोध्या प्रसाद के खेत मेें गेहूं की मड़ाई हो रही
थी।
थ्रेसिंग में महीन काला गेहूं कम मात्रा में निकल रहा था। पूछने पर
वह बोले, ट्रैक्टर से तय मड़ाई का गेहूं भी नहीं निकल रहा। ऐसे मेें
परिवार के भरण पोषण के लिए उन्हें बाहर जाकर मेहनत मजदूरी ही करनी होगी।
उन्हीं के पास खेत में खड़े ब्रह्मा नंद बाजपेयी ने भी अपना दुखड़ा सुनाना
शुरू कर दिया।
बोले, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेत मेें पहले फसल चटाई
की तरह बिछ गई। जब काटने की बारी आई तो बाली में गेंहू का दाना नहीं निकला।
बेटी की शादी मई माह में होनी थी, उसे भी वर पक्ष से मनुहार कर आगे के लिए
टाल दिया। पिता के नाम से जारी केसीसी पर एक लाख रुपये के ऋण की अदायगी के
लिए बैंक दबाव बना रही है।
इससे वह खासे परेशान हैं। गांव के सुनील कुमार
के पास ढाई बीघा खेत जिसमें बर्बाद हुई फसल से वह परिवार के सात सदस्यों के
भरण पोषण को लेकर चिंतित है। इसी गांव के रामनरेश मिश्रा का कहना है कि
कटाई को मजदूर नहीं मिल पा रहे और आधे खेत में थ्रेसिंग भी नहीं हो पा
रही। जिस कारण जानवरों के चारे की भी समस्या होगी।
यहीं हाल अमित और
श्रीकृष्ण का है। इनके खेत में भी फसल बर्बाद हुई। जो फसल बची उसमें भी
काला गेहूं निकल रहा। किसानों को इस बात का मलाल है कि संकट की इस घड़ी में
सांसद ने भी इस गांव में आना मुनासिब नहीं समझा।
उधर, मुंडेर गांव के आदेश
मिश्रा, अनुज दीक्षित, राधेेलाल, नत्थूराम, अनुज कुमार आदि ने बताया कि वह
तो मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर लेंगे, पर मवेशियों का क्या
होगा। बेेचने पर बाजार में उनकी कीमत भी नहीं मिल पा रही। ऐसे में उन लोगों
के सामने बड़ी समस्या है।