शक्ति स्वरूपा महादुर्गा की उपासना के शारदीय नवरात्र
शनिवार से प्रारंभ हो रहे हैं। मां के आगमन को लेकर भक्तों द्वारा
तैयारियां शुक्रवार को भी जोरों पर रही। नवरात्र के आगमन को लेकर बाजारें
भी भक्तिमय नजर आने लगी।
कहने का मतलब यह है कि चंदन की खुशबू से सराबोर
श्रद्धा से परिपूर्ण समां में पूरे आठ दिन चहुंओर मां ही मां के जयघोष
सुनाई देंगे। चैत नवरात्र के शुभारंभ के पहले दिन शनिवार को घट स्थापना
की जाएगी। उसके बाद नियमित रूप से होने वाला पूजन अर्चन आदि विधिवत् रूप
से किया जाता रहेगा।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि पहले दिन माता
दुर्गा की प्रतिमा तथा घट यानी कलश की स्थापना की जाती है। इसके बाद ही
नवरात्र के उत्सव का प्रारंभ होता है। माता दुर्गा व घट स्थापना की विधि का
वर्णन करते हुए बताया कि पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ,
गेहूं बोएं।
फिर उनके ऊपर अपनी शक्ति के अनुसार बनवाए गए सोने, तांबे व
मिट्टी के कलश को विधिपूर्वक स्थापित करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा,
मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति की प्रतिष्ठा करने का विधान है।
मूर्ति
यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें
विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दे। मूर्ति न हो तो कलश के
पीछे स्वास्तिक व उसके दोनों कोनों में बनाकर दुर्गाजी का चित्र पुस्तक तथा
शालिग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु का पूजन कर दें।
बताया कि पूजन
सात्विक हो, राजस या तामसिक नहीं, इस बात का विशेष ध्यान रखे। नवरात्र में
वैसे तो हर मंदिरों में ही मां के जयकारे सुनाई देते हैं, पर शहर के श्रवण
देवी मंदिर, फू लमती देवी मंदिर, दुर्गा मंदिर, जिला अस्पताल चौराहा स्थित
मौनी बाबा मंदिर
आदि में मां की विशेष पूजन अर्चन होता है, जिसमें मां की मूर्ति को सजाने व
उनके दरबार की साफ सफाई क ो श्रद्धालु जुटे रहे।