हरदोई। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ ही पहले से स्थापित उद्यम, व्यवसाय को गति देने के लिए संचालित मुद्रा लोन योजना एनपीए का शिकार होती जा रही है। वैसे योजना का उद्देश्य अच्छा है और बिना गारंटी के ही स्वरोजगार के लिए 10,000 से लेकर 10,00,000 रुपये तक का जरूतमंद को ऋण दिया जा रहा है।
मुद्रा लोन योजना नौ साल की हो गई है। सरकारी गारंटी पर स्वरोजगार की स्थापना और स्थापित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए तीन श्रेणी में ऋण दिए जाने की सुविधा दी गई है। जिले में यह योजना कारगर साबित होती नहीं दिख रही है। लाभार्थियों की ओर से काम बंद कर दिए जाने, व्यवसाय के रुपये फंस जाने और पारिवारिक कारणों से समय से किस्त की अदायगी न किए जाने से करीब 28 प्रतिशत ऋण धारक किस्त जमा नहीं कर पाए हैं। इससे 20,431 लाभार्थियों को डिफाल्टर श्रेणी में रखा गया है। डिफाल्टर श्रेणी में रखे गए 20,431 ऋणधारकों का करीब 127.75 करोड़ रुपया एनपीए किया गया है।
प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना में व्यवसाय और उद्यम स्थापना व संचालित व्यवसाय को बढ़ाए जाने के लिए तीन श्रेणी में ऋण दिया जाता है। इसमें शिशु श्रेणी में 10,000 से 50,000 रुपये, किशोर श्रेणी में 50,000 से 5,00,000 रुपये और तरुण श्रेणी में 5,00,000 से 10,00,000 रुपये तक का ऋण मिलता है। जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक सहित 22 बैंकों की ओर से 92,292 लाभार्थियाें को 759.58 करोड़ रुपये का मुद्रा लोन दिया गया है। इसमें से 20,431 लाभार्थियों ने किस्त की अदायगी नहीं की और 127.75 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) हो गया है। एनपीए श्रेणी में गए लाभार्थियों में किशोर श्रेणी के लाभार्थी शामिल हैं।
मुद्रा लोन योजना में शिशु श्रेणी में 56,564 लाभार्थियों को 106.68 करोड़, किशोर श्रेणी में 31,329 को 412.76 करोड़ और तरुण श्रेणी में 4,399 को 240.14 करोड़ रुपये का मुद्रा लोन दिया गया है।
योजना में यह होते हैं पात्र
प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना में व्यापारी, पेशेवर सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस, आर्किटेक्ट, चिकित्सक पेशेवर और सेवा क्षेत्र में शामिल है। सूक्ष्म उद्यमी योजना के पात्र होते हैं। किसी बैंक शाखा और उद्यमी मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर ऋण लिया जा सकता है। इसके लिए आवेदक के पास वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट सहित अन्य अभिलेख होने चाहिए।
केस एक
शहर से सटे रद्धेपुरवा निवासी फर्नीचर निर्माता व व्यवसायी शिवमंगल सिंह ने बताया कि उनका कारोबार पहले से संचालित है। साल 2021-2022 में बैंक से मुद्रा लोन योजना में कर्ज लिया था। किस्त की नियमित मासिक तौर पर अदायगी भी कर रहे थे। फर्नीचर की आपूर्ति का भुगतान फंस जाने से किस्त जमा किए जाने का क्रम टूट गया, जिससे खाता एनपीए में चला गया। आपूर्ति किए गए फर्नीचर के भुगतान का प्रयास कर रहे हैं, मिलते ही कर्ज की अदायगी करेंगे।
केस दो
अब्दुलपुरवा निवासी मो. याकूब ने बताया कि व्यवसाय के लिए बैंक से योजना में कर्ज लिया था। साल 2021-2022 में लिए गए कर्ज की कुछ किस्तें समय से भरी भी, लेकिन पारिवारिक समस्या के चलते किस्तों की मासिक अदायगी में दिक्कतें आईं। इससे खाता एनपीए हो गया। पारिवारिक समस्या के कारण वह परेशान भी है। समस्या का समाधान होते ही फिर से किस्त की अदायगी की जाएगी।
एनपीए होने के पांच प्रमुख कारण
- 10 से 11 फीसदी की ब्याज दर।
- हर माह भरनी पड़ती है किस्त।
- तीन किस्त न जमा करने पर हो जाता है एनपीए।
- 50 फीसदी लाभार्थी ऋण लेने के बाद व्यवसाय कर देते हैं ठप।
- लाभार्थी पैसा लेने के बाद नहीं भरना चाहते ऋण।
- बैंकों द्वारा ग्राहकों को सही जानकारी न देना।
-
कर्ज का सदुपयोग न करने से खाते हो रहे एनपीए
ऋण के लिए बैंक में ऑफलाइन और उद्यमी मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिए जाते हैं। वैसे तो बैंकर्स की ओर से स्थलीय जांच-पड़ताल के बाद ही ऋण की स्वीकृति दी जाती है, लेकिन लाभार्थी कर्ज लेने के बाद अदायगी में टाल-मटोल करता है। बड़ी संख्या में लाभार्थी ऋण का सदुपयोग ही नहीं करते हैं या फिर कारोबार शुरू कर कुछ दिन बाद बंद कर दे रहे हैं। इससे खाते एनपीए हो रहे हैं। ब्याज दर एफडी के अनुसार कम और अधिक होती रहती है। सभी बैंकों के नियम अलग हैं। ऋण की वसूली की नियमित समीक्षा की जाती है और वसूली के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि एनपीए में कमी लाई जा सके। -अरविंद कुमार रंजन, अग्रणी जिला प्रबंधक