हरदोई। स्मार्टफोन जरूरत से ज्यादा हमारी कमजोरी बन चुका है। मोबाइल का अत्यधिक उपयोग न केवल आंखों और गर्दन को नुकसान पहुंचा रहा बल्कि यह इंसानी स्वभाव में गहरा चिड़चिड़ापन और मानसिक अस्थिरता को भी पैदा कर रहा है।
इससे सोचने व समझने के साथ ही याददाशत में भी कमी आ रही है। ऐसी तरह की तमाम समस्याओं को लेकर रोजाना एक सैकड़ा से अधिक मरीज मनोचिकित्सा विभाग में परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाएं और बच्चों की संख्या काफी अधिक है।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बीते 30 दिनों में 90 बच्चों की जांच हुई। इनमें 67 ऐसे मिले जिनमें सोचने, समझने का स्तर सामान्य से काफी कम है। जब उनसे सवाल किए गए तो वह समझ ही नहीं पाए। बार-बार पूछने पर वह चिड़ाचिड़ा गए। ऐसे ज्यादातर बच्चों की उम्र 6-12 साल है। मनोचिकित्सक डॉ. ऋतु खरे ने बताया कि मोबाइल पर रील देखने की लत बच्चों, युवा और महिलाओं में अधिक है।
इससे लोग सामाजिक होना कम होते जा रहे हैं, आपस में बातचीत करना और घुलना मिलना कम कर रहे हैं। इससे उनमें अवसाद बढ़ रहा है। बच्चों को भी अक्सर रोने या खाना खिलाने पर अभिभावक उन्हें मोबाइल देकर एक किनारे बैठा देते हैं। यही वजह है कि बच्चे मोबाइल से मिली जानकारी को ज्यादा ठीक तरीके से समझते हैं। उस पर विश्वास भी करते हैं।
मोबाइल बढ़ा रहीं बच्चों में समस्याएं
मानसिक रोग विभाग में ऐसे बच्चे भी पहुंच रहे हैं जिनकी सोचने व समझने की शक्ति कमजोर हुई है। झगड़ा और जिद्दीपन भी देखने को मिल रहा है। चिकित्सक बताती हैं कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों की पहले काउंसलिंग की जाती है। इसके बाद बच्चों की होती है। करीब दो से छह माह तक एक समय अंतराल में यह क्रम चलता है। जरूरत पड़ने पर दवाएं भी दी जाती हैं। मोबाइल का प्रयोग कम से कम करें और लाेगों को जागरूक करें। समस्या बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज स्थित मानसिक रोग विभाग में संपर्क करें।
मोबाइल की लत के लक्षण
- फोन न मिलने पर अचानक गुस्सा आना या बेचैनी होना।
- सुबह उठते ही सबसे पहले नोटिफिकेशन चेक करना।
- खाना खाते समय या बातचीत के दौरान भी बार-बार स्क्रीन देखना।
- काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।
- रात को सोते समय घंटों स्क्रोलिंग करना।
अभिभावक ऐसे करें बचाव
तीन साल की उम्र के बाद बच्चे को सिर्फ एक घंटे ही टीवी देखने दें।
-मां सिर्फ अपना दूध ही बच्चे को पिलाएं।
-दूध पिलाते समय बच्चे से बात करें।
-बोतल से दूध पिला रहीं है तो गोद में लेकर ही पिलाएं।
-खाना खाते समय अभिभावक भी टीवी व मोबाइल न देखें।
- बच्चों के सामने मोबाइल का प्रयोग करने से बचें।
फोटो-10- चिकित्सक कक्ष के बाहर बैठे रोगी। संवाद