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श्यामप्रकाश ने वापस मांगे कोरोना संकट से निपटने को दिए 25 लाख रुपये

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हरदोई। स्वास्थ्य विभाग के केंद्रीय औषधि भंडार के जरिये होने वाली खरीद में अनियमितता उजागर होने के बाद गोपामऊ से भाजपा विधायक श्यामप्रकाश ने कोरोना संकट से निपटने के लिए अपनी निधि से दिए गए 25 लाख रुपये वापस मांगे हैं। विधायक श्यामप्रकाश ने खरीद में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की आशंका जता खर्च का हिसाब न देने के कारण रुपये वापस मांगे हैं। इस संबंध में उन्होंने गोपनीय पत्र सीडीओ को भेज दिया है।
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कोरोना संकट में जिले में सबसे पहले गोपामऊ से भाजपा विधायक श्यामप्रकाश ने अपनी विकास निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। उन्होंने इससे संबंधित पत्र मुख्य विकास अधिकारी को भेजा था। निधि का प्रयोग उनके क्षेत्र की जनता को कोरोना से बचाव के लिए इंतजामों पर खर्च करने की बात कही थी। बाद में शासनादेश के मुताबिक निधि से दिए गए 25 लाख रुपये से कोरोना से निपटने के लिए विभिन्न उपकरण व सामग्री खरीदने के संबंध में संशोधित पत्र विधायक ने भेजा था। सीडीओ ने विधायक का पत्र ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक राजेंद्र श्रीवास को भेज दिया था। निधि से आवंटित 25 लाख रुपये में से 60 फीसदी धन पहली किस्त के रूप में खरीद के लिए कार्यदायी संस्था माने गए सीएमओ को भेज दिया गया। इस बीच स्वास्थ्य विभाग के केंद्रीय औषधि भंडार से हुई खरीद में घपले का मामला उजागर हुआ। इस पर विधायक श्यामप्रकाश ने सीडीओ निधि गुप्ता वत्स को पत्र भेजकर लिखा है कि स्वास्थ्य विभाग हरदोई में चिकित्सा सामग्री खरीदने में भ्रष्टाचार किया जा रहा है। विधायक निधि की धनराशि से भी सामग्री क्रय में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की बात चल रही है। इसके चलते पूर्व में निर्गत की गई 24 लाख 99940 रुपये की राशि तत्काल वापस उनकी निधि के खाते में भेजी जाए ताकि इसका इस्तेमाल जनहित के अन्य कार्यों पर किया जा सके।
सीडीओ से मांगा था हिसाब, नहीं मिला जवाब
विधायक श्यामप्रकाश ने 16 अप्रैल को सीडीओ को पत्र भेजा था। इसमें विधायक ने कहा था कि उन्होंने अपनी निधि से कोरोना संकट से निपटने के लिए 24 लाख 99940 रुपये दिए हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से सीडीओ से पूछा था कि बताया जाए कि इस धन से अब तक स्वास्थ्य विभाग ने क्या-क्या खरीदा और कहां-कहां उसका उपयोग हुआ। शनिवार तक भी इसका जवाब विधायक को नहीं मिला तो खरीद में खेल की आशंका जताई।
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असमंजस में अधिकारी
विधायक का पत्र जारी होने के बाद ग्राम्य विकास अभिकरण के अधिकारी और कर्मचारी असमंजस में हैं। कारण ये है कि विधायक निधि से 25 लाख रुपये अवमुक्त करने संबंधी पत्र पर इसका 60 फीसदी धन पहली किस्त के रूप में स्वास्थ्य विभाग को दिया जा चुका है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी और कर्मचारी कह रहे हैं कि अब उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लिया जाएगा और तभी आगे कोई कार्रवाई होगी।
दो खरीद के मामले हैं सुर्खियों में
केंद्रीय औषधि भंडार ने बिना टेंडर के ही फरवरी में नौ लाख रुपये से अधिक के बैंडेज खरीद लिए थे। पूरे मामले की शिकायत भाजपा जिला उपाध्यक्ष संदीप सिंह ने डीएम से की थी। जांच में खरीद की प्रक्रिया गलत होने की पुष्टि हुई थी। इससे पहले छह दिसंबर 2019 को भी डीएम ने नई पहल किट की खरीद में गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय औषधि भंडार के जिम्मेदारों से जवाब तलब किया था। हालांकि ये मामला बाद में ठंडे बस्ते में चला गया।
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