सुभाष चंद्र बोस जन कल्याण समिति के तत्वावधान में
रविवार को सरस्वती सदन में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें सामाजिक
चिंतकों ने विचार गोष्ठी में वर्तमान में शिक्षा की बदलती स्थिति पर निराशा
व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक होेने और राष्ट्र
निर्माण में योगदान करने की अपील की है।
आर्चिशा इंटर नेशनल ट्रस्ट और
सुभाष चंद्र बोस जन कल्याण समिति के तत्वावधान में वर्तमान शिक्षा और हम
विषय पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का
शुभारंभ माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए दीप जलाया। जिसके
उपरांत रामदेव बाजपेयी ने वाणी वंदना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के मुख्य
अतिथि संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. शिवशरण सिंह चौहान ने
कहा कि वर्तमान शिक्षा अपने मूल उद्देश्यों से भटक रही है। उन्होंने कहा कि
शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का चरित्र निर्माण होना चाहिए। कहा कि
चरित्रवान व्यक्ति से ही श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण होता है।
अध्यक्षता
करते हुए आर्चिशा इंटरनेशनल स्कूल के सीईओ एमके मिश्रा ने कहा कि भारत
प्राचीनकाल से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। कहा कि सुदूर देशों के
विद्यार्थियों ने भारत आकर शिक्षा ग्रहण की है। ऐसे में हम सभी का नैतिक
दायित्व बनता है कि हम अपने बच्चों को ऐसी ही शिक्षा प्रदान करें, जिससे
उनका समुचित विकास हो सके और वह राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
इस मौके पर सुभाष समिति के अध्यक्ष मनीष मिश्र ने वर्तमान शिक्षा और हम
विषय पर अपने विचार देते हुए वर्तमान शिक्षा की स्थिति पर निराशा व्यक्त की
और लोगों से जागरूक होकर बेहतर शिक्षा की अपील की। वरिष्ठ नागरिक समिति के
अध्यक्ष चंद्रशेखर, मो. आलम रब्बानी, आशीष सिंह सोमवंशी ने भी अपने विचार
व्यक्त किए।