हरदोई/कछौना। हरदोई-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कछौना कोतवाली क्षेत्र में कटियामऊ के पास टिनशेड के नीचे चल रहे अस्पताल को बुधवार को सील कर दिया गया।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर डीएम और सीएमओ के निर्देश पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर छप्पर के नीचे वार्ड में भर्ती मिली कैंसर मरीज को सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना में भर्ती कराया। इस दौरान अस्पताल संचालक और उसका सहयोगी मौके से भाग निकले।
कटियामऊ के सामने फौजी अस्पताल संचालित था। यह अस्पताल टिनशेड के नीचे संचालित हो रहा था। वार्डाें के नाम पर यहां छप्पर पड़े हुए थे और इन छप्परों के नीचे ही मरीज भर्ती थे। अमर उजाला ने इस अस्पताल की हकीकत बुधवार के अंक में प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेकर डीएम एमपी सिंह ने सीएमओ डॉ. रोहताश कुमार को तत्काल टीम भेजकर वास्तविकता पता करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में सीएमओ डॉ. रोहताश कुमार ने डिप्टी सीएमओ डॉ. मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम मौके पर भेज दी। सीएचसी कछौना के अधीक्षक डॉ. किसलय वाजपेयी भी इस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। डिप्टी सीएमओ डॉ. मनोज कुमार सिंह के मुताबिक उन्नाव जनपद के कमलापुर निवासी पूनम यहां भर्ती मिलीं। छप्पर के नीचे बेड डालकर उनका उपचार किया जा रहा था और वह कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें सीएचसी भेज दिया गया।
पूनम ने ही जांच टीम को बताया कि दो और मरीज भर्ती थे, लेकिन बुधवार की सुबह डॉ. एके पासवान ने आकर बताया कि वह बाहर जा रहे हैं और दोनों मरीजों की छुट्टी कर दी। मौके पर जब टीम पहुंची तो न चिकित्सक मिले और न ही उनके सहयाेगी। अस्पताल में छापा पड़ने की जानकारी पर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। सीएमओ डॉ. रोहताश कुमार ने बताया कि अस्पताल संचालक को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब मांगा जाएगा। जवाब न मिलने पर या जवाब संतोषजनक न होने पर एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
फौजी अस्पताल में बुधवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. मनोज सिंह के नेतृत्व वाली टीम को छापा डालने के दौरान पता चला कि अस्पताल का पंजीकरण 18 अक्तूबर 2023 को किया गया था। यह पंजीकरण 30 अप्रैल 2024 तक ही मान्य था। इसके बाद पंजीकरण का नवीनीकरण कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। फौजी अस्पताल के संचालक ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था। मतलब यह कि अस्पताल का पंजीकरण भी खत्म हो चुका था।
डिप्टी सीएमओ डॉ. मनोज सिंह से अस्पताल संचालक कथित डॉक्टर एके पासवान की चिकित्सा शिक्षा संबंधी डिग्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में पता चला है कि एके पासवान चिकित्सक नहीं हैं। उनके पास एमबीबीएस या इसके समकक्ष कोई डिग्री नहीं है। सधे शब्दों में कहें तो अस्पताल संचालक झोलाछाप ही है।