शनिवार को पारे ने ऐसा ‘पंच’ मारा कि कड़क ठंड से
जनजीवन की रफ्तार धीमी हो गई। शहर में कोहरे, हवा व गलन के चलते कर्फ्यू सा
दृश्य रहा तो इसके प्रकोप में हाड़ कंपाने वाली शीत लहर ने रोजमर्रे की
जिंदगियों को थाम सा दिया। साधन संपन्न लोगों ने जहां हीटर या अन्य
संसाधनों से सर्दी से बचने का प्रयास किया तो वहीं गरीब फटी लिपटी शालों से
ही अपने आप का बचाव करते ठिठुरते देखे गए।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है
कि अकस्मात ठंड से लोग बिलबिला से गए हैं। बच्चों से लेकर बढ़े तक कमरों
में दुबक गए, तो पारे के लगातार ऊपर नीचे होने से जनजीवन अस्त व्यस्त होने
लगा है। बर्फीली हवाओं ने लोगों पर काफी असर डाला है। मौसम वैज्ञानिक
जयशंकर मिश्रा ने बताया कि पश्चिम उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी हवाओं का
क्रम लगातार बना हुआ है।
सतह पर हवा की गति पांच किमी प्रति घंटा तक है।
बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान जहां 10.5 डिग्री रहा, वहीं न्यूनतम 5
डिग्री दर्ज किया गया। उन्होंने बारिश आदि की संभावना से भी इंकार नहीं
किया। उधर, अबकी ठंड को सहन करने वाले हर शख्स के मुंह से एक बात कभी न
कभी यह जरूर निकल गई कि हाय इस बार तो ठंड ने अति कर दी।
उधर, इसी ठंड
को मौसम वैज्ञानिकों से लेकर जानकार तक पर्यावरणीय क्षति को जिम्मेदार मान
रहे हैं। उनका साफ मानना है कि जिस तरह से प्रकृति से खिलवाड़ हो रहा, उसी
तरह प्रकृति भी असंतुलित होकर अपना प्रकोप अति ठंड व प्रचंड गर्मी के रूप
में दिखाती है। विगत कुछ वर्षों से मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल
रहा है।
पर्यावरणीय असंतुलन प्रमुख समस्या बनी हुई है। मौसम के बदले मिजाज
ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता को बढ़ा दिया है। विषय विशेषज्ञ नवनीत सिंह
राठौर का कहना है कि भौगोलिक कारणों से कर्क रेखा भारत की जलवायु को दो
भागों में बांटती है। उत्तरी भाग को सब ट्रापिकल टेंपरेट जोन व दक्षिणी भाग
को ट्रापिकल जोन के रूप में जाना जाता है।
कहा कि समुद्र से घिरे रहने से व
दक्षिण ध्रुव के कारण दक्षिण का तापमान नियंत्रित रहता है। वहीं उत्तरी
हिस्से में मौसम अति गर्म व अति ठंडा होता रहता है। खासकर जाड़े के मौसम
में आर्क टिक क्षेत्र से ठंडी व सूखी हवाएं चलती रहती हैं, जो कें द्रीय व
पूर्वोत्तर एशिया से गुजरती हैं।
वह भारतीय क्षेत्र में घुसते ही पंजाब,
राजस्थान में आगे बढ़ती है। अधिकांशत: इसी ओर से ठंड का प्रकोप बढ़ता है।
कोहरे ने जहां जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया, वहीं रोडवेज बस अड्डे व बसें
भी सर्दी केे प्रकोप से अछूती नहीं रह सकी हैं।
सुबह तो कोहरे धुंध में न
तो यात्री ही बस अड्डे पहुंच पा रहे और न ही यात्रियों की कमी के चलते बसों
का संचालन ही सही तरीके से हो पा रहा है। रोडवेज की बसों का ही यह हाल
नहीं है निजी बस अड्डों से होने वाली बसों के संचालन में भी ऐसा ही कुछ
देखा जा रहा है, जिससे सन्नाटा पसरा रहा।