महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को उन्नति एवं
विकासशील बनाने में छात्र-छात्राओं के साथ ही अभिभावकाें की विशेष भूमिका
है। महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में शनिवार
को आयोजित अभिभावक-प्राध्यापक गोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात प्राचार्य
डा. आरके मिश्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि अनुशासन एवं सतत प्रयास
उन्नति का मूल मंत्र है, जिसे वह महाविद्यालय में लागू करने के लिए कृत
संकल्प है। आयोजक डा. मीना श्रीवास्तव ने कहा कि आज उच्च शिक्षा का स्वरूप
बदल चुका है। विश्व स्तर पर चुनौतीपूर्ण शिक्षा को छात्र-छात्राओं को तैयार
करने में समाज के सभी अंगों में शामिल अभिभावक, प्राध्यापक, समाज, नीति
निर्माता, सरकारी तंत्र, बैंक, विवि अनुदान आयोग आदिर को
अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।
सभी के तालमेल व सक्रिय सहयोग से ही
उच्च शिक्षा की चुनौतियाें का सामना किया जा सकता है। डा. शरद वैश्य ने कहा
कि छात्र-छात्राओं में सृजनात्मकता के बीज तो अभिभावक डालकर भेजते हैं,
उन्हें पुष्पित और पल्लवित करने की भूमिका टीचरों की होती है।
डा. मीशू
सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान मुहैया करा देने मात्र
से उनको जीवन में सफल नहीं बनाया जा सकता है। उन्हें चुनौतियों का सामना
करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ना होगा। डा. किरन यादव ने कहा
कि किसी भी शिक्षण संस्था में टीचर, अभिभावक व विद्यार्थी तीन मुख्य घटक
हैं, इसलिए तीनों घटकों में आपसी सहयोग व समन्वय अतिआवश्यक है।
डा. पवन
चौहान ने छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों के बेहतर सहयोग का आह्वान किया।
डा. एनएन यादव ने अभिभावकों व टीचरों को साथ मिलकर काम करने का आह्वान
किया। अभिभावकों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास कार्यक्रमों
की शुरुआत, क्रीड़ा, पुस्तकालय की बेहतर व्यवस्था आदि करने का परामर्श
दिया।
इस मौके पर पीसी वैश्य, अमित यादव, नेत्रपाल सिंह, आरएम सिंह,
राजेश सोनकर, प्रज्ञा मिश्रा, डा. मधुमिता गुप्ता, डा. तारकेश्वर गुप्ता,
डा. मंजुल गुप्ता, डा. सुरेंद्र प्रताप, डा. अभिषेक सेंगर और डा. उदय
प्रकाश पासवान आदि मौजूद थे।