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गन्ना किसानों को खेती के आधुनिक तरीके सिखाएगा मीठा सोना एप

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टोडरपुर (हरदोई)। हरियावां, लोनी और रूपापुर चीनी मिल ने किसानों के लिए मीठा सोना एप विकसित किया है। जिसमें गन्ने की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकी से लेकर फसल को कीटों से बचाने तक की जानकारी अब उसे मोबाइल पर ही मिल जाएगी। किसान इस एप के जरिए अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत कर सकेंगे।
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जनपद में बड़े क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। गन्ना किसानों की संख्या भी एक लाख से अधिक है। इन किसानों का गन्ना जनपद के हरियावां, लोनी और रूपापुर में संचालित चीनी मिलों में खरीदा जाता है। आमतौर पर तीनों ही चीनी मिलों की ओर से समय-समय पर किसानों को गन्ने की खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण ऐसे आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए अब चीनी मिल ने मीठा सोना एप किसानों के लिए विकसित किया है।
इस एप पर गन्ने की खेती से जुड़े छह अलग अलग हिस्से हैं। पहले भाग में गन्ने की उन्नत खेती के तौर तरीकों के बारे में जानकारी मिलेगी। बीज प्रबंधन से लेकर खाद, दवाई आदि के बारे में भी जानकारी होगी। दूसरे भाग में खेत की मिट्टी के बारे में पूरा ब्योरा होगा। मिट्टी को कैसे और अधिक उर्वरक बनाया जा सकता है, इसकी जानकारी रहेगी। तीसरे भाग में बताया गया है कि कैसे कम पानी का उपयोग कर गन्ने की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। एक अन्य भाग में कीट प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। कीटनाशकों के न्यूनतम इस्तेमाल के बारे में भी इस एप के एक भाग में जानकारी दी गई है। किसानों को अपने सवाल पूछने के लिए भी एप में व्यवस्था दी गई है।
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किसानों के सवालों के जवाब 24 घंटे के अंदर दिए जाएंगे। इस एप को शुक्रवार को चीनी मिलों के अधिशासी निदेशक आरएल टामक ने वर्चुअल बैठक कर जारी किया। इस एप को तीनों चीनी मिलों ने इंटरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेशन की मदद से तैयार किया है।
गूगल प्ले स्टोर से निशुल्क कर सकते डाउनलोड
कोई भी किसान मीठा सोना एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकता है। इसके लिए कोई शुल्क देय नहीं है। एंड्रायड मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन की ही जरूरत पड़ती है। आम तौर पर इन दिनों हर मोबाइल में नेट का कनेक्शन भी रहता है। यह एप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कार्य करता है।
तो वीडियो और चित्रों से समझें किसान
चीनी मिल के अधिशासी निदेशक आरएल टामक का कहना है कि अगर कोई किसान पढ़ा लिखा नहीं है तो भी एप के माध्यम से उसे कई जानकारियां मिल सकती हैं। एप में कई छोटे छोटे वीडियो डाले गए हैं। इसके अलावा चित्रों के माध्यम से भी किसानों को समझाने का प्रयास किया गया है। किसानों को इस एप से काफी मदद मिलेगी।
किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा एप
अधिशासी निदेशक आरएल टामक का कहना है कि अब डिजिटल युग है। कोरोना संकट में हर किसान तक कर्मचारी नहीं पहुंच पा रहे, तो डिजिटल प्लेटफार्म तैयार कर दिया गया है । हर किसान इससे जानकारी ले सकता है और अपनी जिज्ञासा को भी शांत कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल एप किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
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