हरदोई। जनपद के मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का हाल बदहाल है। बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। हालत यह है कि जीवन रक्षक वेंटिलेटर प्रणाली टेक्नीशियनों के अभाव में बंद पड़ी है। इतना ही नहीं बीते कई दिनों से इमरजेंसी की बीपी नापने की मशीन तक खराब पड़ी है। मरीजों को सिर्फ प्राथमिक उपचार मिल पाता है। इसके बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में कहने को तो वेंटिलेटर मौजूद हैं लेकिन तकनीकी खराबी या टेक्नीशियनों की कमी के चलते यह केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। वेंटिलेटर का संचालन कराने के लिए बीते कई महिनों से प्रयास किया जा रहा है लेकिन अभी तक कोई भी सुधार नहीं हुआ। कहने तो मेडिकल कॉलेज में 69 वेंटिलेटर रखे हैं पर इनमें चलने लायक एक भी वेंटिलेटर। इन वेंटिलेटरों में से जो दो सबसे बेहतर स्थिति में थे उनको सुधारने के लिए इंजीनियर बुलाए गए थे लेकिन जांच में वह भी खराब पाए गए।
ऐसे में वेंटिलेटर न होने से गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है और उन्हें रेफर कर दिया जाता है। हद तो तब है जब मरीजों की जांच के लिए बीपी मशीन तक उपलब्ध नहीं है। पारा (मरक्यूरी) वाली स्टैंडिंग बीपी मशीन खराब होने से मरीजों को ब्लड प्रेशर मापने जैसी सामान्य प्रक्रिया के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। जरुरत पड़ने पर आईसीयू से मशीन मंगवाई जाती है।
रेफरल सेंटर में तब्दील हुई इमरजेंसी
इमरजेंसी वार्ड में आने वाले गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज में सिर्फ प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। दिन में तो वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद होने के कारण कुछ उपचार हो जाता है लेकिन रात में सिर्फ जूनियर रेजिडेंट चिकित्सक ही मिलते हैं जो सिर्फ मरहम पट्टी करने के बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। सड़क हादसों में घायल या दिल का दौरा पड़ने वाले मरीजों के लिए यहां के कीमती शुरुआती मिनट (गोल्डन ऑवर) केवल कागजी कार्रवाई और रेफरल स्लिप बनवाने में बीत जाते हैं।
ठंडे बस्ते में वेंटिलेटर चलाने की कोशिश
वेंटिलेटर चलाने की कोशिश एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली गई है। बीते कई महिनों से वेंटिलेटरों को चलाने का प्रयास हो रहा है लेकिन अभी तक टेक्नीशियन और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती ही नहीं की जा सकी। करीब तीन माह पहले प्रधानाचार्य ने जल्द ही वेंटिलेटरों के संचालन का आश्वासन दिया था लेकिन अभी स्थिति वैसी ही है।
वेंटिलेटरों की जांच कराई जा चुकी है, तकनीकी खराबी निकली है। उपकरण बदले जाने या फिर नए वेंटिलेटर आएंगे। प्रयास लगातार किया जा रहा है। जल्द ही संचालन किया जाएगा। स्टैंड वाली बीपी मशीन मौजूद है, जरुरत पड़ने पर प्रयोग की जाती है। -डॉ. अमित आनंद, प्रभारी, आकस्मिक कक्ष