हरदोई। एक अंग्रेजी तो दूसरा गणित एक ऐसा विषय है जिसकी किताबें खोलने से पहले ही विद्यार्थी जानता है कि यह कठिन है, इसे गणितीय सदमा भी कह सकते हैं। यदि इस सदमेे को शिक्षक अपने विद्यार्थियों के बीच से निकाल दें तो गणित कतई कठिन नहीं रह जाएगी। जीआईसी के स्काउट भवन में गुरुवार को गणित विषय का उपचारात्मक प्रशिक्षण देते हुए प्रशिक्षक डायट प्रवक्ता उमेश चंद्र वर्मा ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि गणित समझाने से पूर्व शिक्षकों को स्कूलों में माहौल भी बनाना चाहिए, जिससे छात्र-छात्राएं गणित को आसानी से समझ सकें। उन्होंने शिक्षक शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कक्षा में उन्हीं बच्चों को होनहार बताया जाता है जो गणित के सूत्र जल्दी याद कर लें, उन्हे हल जल्दी कर लें और जिन्हे सूत्र याद नहीं होते उन्हे कमजोर करार दे दिया जाता लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। शिक्षकों को सभी बच्चों को साथ लेकर चलना है।
उन्हे सूत्र किस तरह से याद कराएं इसका तरीका खोजना है यदि प्रशिक्षण का उद्देश्य है। इसको सिखाने के लिए बच्चों के बीच टीचिंग लर्निंग मेटेरियल टीएलएम का भी प्रयोग कर सकते। बच्चों को दो भागों में बांट उनसे प्रतिस्पर्धा करवाकर भी सूत्र याद करवा सकते। इस दौरान चार्ट की मदद से भी शिक्षक शिक्षिकाओं के बीच नए नए प्रयोग बच्चों को सिखाने के लिए किए गए।