पिहानी (हरदोई)। मोहल्ला कोटकलां में हुए समाज सुधार जलसे में तरीका-ए-रसूल की पैरवी करने का आह्वान किया गया। उलमा-ए-कराम ने शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची से होने वाले नुकसान पर चर्चा की। पानी टंकी के निकट मैदान पर सुन्नी धर्मगुरु मौलाना रुहउल्लाह बिहारी की अध्यक्षता में हुए जलसे में काजी-ए-शहर जसपुर (उत्तराखंड) मुफ्ती एखलाक ने कहा कि नबी ने जो किया वही तरीका कामयाबी की तरफ ले जाने वाला है।
नबी के तर्जे जिंदगी को अपना कर दुनिया में भी इज्जत पाई सकती है। उन्होंने कहा कि नबी का तरीका समझना है तो सहाबा-ए-कराम के जीवन को पढ़ें। उन्होंने कहा कि तमाम बुराइयां बेपर्दगी के कारण पनप रही हैं। पर्दा रहमत है और बेपर्दगी लानत। मुस्लिम बेपर्दगी से बचने का एहतमाम करें। इससे पहले जहांगीराबाद से आए मौलाना इस्लामुलहक ने कहा कि नमाज और कुरआन से दूरी हमारे समाज में व्याप्त तमाम समस्याओं की जड़ है। कुरआन में तमाम समस्याओं का हल मौजूद है। अगर हम पूरी तरह से कुरआनी तालीमात पर अमलपैरा हो जाएं तो इस धरती पर ही स्वर्ग का अनुभव होने लगेगा।
उन्होंने शादी- ब्याह में प्रचलित गैर इस्लामिक रस्मोरिवाज को मिटाने पर जोर देते हुए कहा कि हमने निकाह को इतना कठिन और खर्चीला बना दिया कि गरीब घरों में बेटियाें की उम्र ढल रही हैं। निकाह को इस्लामी दायरे में करें। शादी आसान होगी तो गरीब बच्चियों के लिए भी आसानी होगी। मौलाना सगीर कासमी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम की शुरुआत कारी अलताफ की तिलावते कुरआन से हुई थी। इस दौरान हकीमुद्दीन हैरत ने नात पढ़ी। संचालन मौलाना सबीहुद्दीन कासमी ने किया। कार्यक्रम के दौरान मौलाना तुफैल, मौलाना अतीकुर्रहमान व हाफिज़ जैनुद्दीन ने सक्रियता के साथ व्यवस्थाएं संभालीं।