हरदोई। दिवाली के अवकाश के बाद सोमवार को खुलीं सहकारी समितियों और विक्रय केंद्रों पर डीएपी के लिए किसान उमड़ पड़े। दावा है कि सहकारिता विभाग की ओर से 3,500 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया, लेकिन ज्यादातर समितियों के पास डीएपी खाद नहीं होने की वजह से किसानों को निराश लौटना पड़ा। वहीं, डीएम का कहना है कि खाद पर्याप्त मात्रा में आ गई है। सभी किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए खाद दी जाएगी।
समितियों और विक्रय केंद्रों पर डीएपी खाद लेने के लिए किसान सोमवार को सुबह से ही लाइन लगाने लगे थे। जिन समितियों के पास स्टॉक था, वहां पर वितरण किया गया। कई समितियों के पास खाद ही नहीं थी। कइयों के पास सीमित स्टॉक था। इस वजह से सभी किसानों को खाद नहीं मिल पाई। सहकारिता के सहायक आयुक्त आशीष कुमार मेहता ने बताया कि 26,000 बोरी डीएपी खाद मिल गई है। इसका भंडारण कराया गया है। किसानों को वितरण के लिए जरूरत के हिसाब से समितियों और विक्रय केंद्रों को आवंटन किया जाएगा।
दरअसल, रबी की फसलों की बुवाई के लिए किसान समितियों और विक्रय केंद्रों से ही डीएपी खाद की खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस वजह से डीएपी की मांग समितियों और विक्रय केंद्रों पर बढ़ गई है। नवंबर माह गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसलिए किसान गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने के साथ बीज और खाद की व्यवस्था करने में जुटे हैं।
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महज 74 किसानों को ही मिल पाई डीएपी
बिलग्राम प्रतिनिधि के अनुसार, पीसीएफ की खाद गोदाम पर डीएपी का वितरण तो शुरू हुआ, लेकिन गोदाम पर उपलब्ध 148 बोरी डीएपी से दो-दो बोरी के हिसाब से महज 74 किसानों को ही डीएपी मिल पाई। डीएपी की आस में बड़ी संख्या में किसानों को मायूस होना पड़ा। मदारा से 14 किलोमीटर दूर से आए किसान बलराम सिंह ने बताया कि उन्हें मुश्किलों के बाद डीएपी नहीं मिली। नौ किलोमीटर दूर से आए बेहटा बुजुर्ग निवासी किसान मान सिंह ने बताया कि उन्हें भी डीएपी नहीं मिल पाई है। गोदाम प्रभारी अवध बिहारी ने बताया कि अवकाश से पहले 600 बोरी डीएपी मिली थी, जिसका वितरण सोमवार को 148 बोरी के साथ हो गया। और डीएपी की मांग की गई है।
चिमना समिति में खाद ही नहीं, बेहटा में 80 बोरी खाद बंटी
बेहटा गोकुल प्रतिनिधि के अनुसार, सहकारी समिति चिमना पर किसान डीएपी के लिए आए, लेकिन स्टॉक नहीं होने से खाली हाथ लौटना पड़ा। सचिव गोपाल सिंह ने बताया कि डीएपी स्टोर में नहीं है। 300 बोरी की मांग की गई है। मंगलवार या बुधवार को मिलने की उम्मीद है। बेहटा गोकुल सहकारी समिति पर 80 बोरी डीएपी का वितरण किया गया। स्टॉक खत्म होने के कारण किसानों को मायूस होना पड़ा। सचिव अशोक सिंह ने बताया 300 बोरी डीएपी आई थी। गुलामऊ निवासी किसान सालिकराम ने कहा कि टोकन मिला है, एक आधार पर एक बोरी मिलने की बाद बताई गई है। किसान धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि एक बोरी डीएपी का टोकन मिला है।
बंदीपुर साधन सहकारी समिति में डीएपी नहीं
मल्लावां प्रतिनिधि के अनुसार, दारुकुइया व बंदीपुर साधन सहकारी समिति के पास डीएपी खाद नहीं है। इस वजह से किसानों को निराशा हाथ लगी। सचिव राजबहादुर ने बताया कि दारूकुइया और बंदीपुर के लिए 900-900 बोरी खाद मिली थी, जिसका वितरण हो चुका है। शाहपुर गंगा के सचिव सुधीर ने बताया कि 900 बोरी खाद मिली थी, इसमें से 600 बोरी का वितरण हो चुका है। स्टोर में उपलब्ध 300 बोरी का वितरण किया जा रहा है। दो बोरी डीएपी के साथ नैनो यूरिया का भी वितरण किया गया। गोसेवा की सचिव मनोरमा ने बताया कि 29 अक्तूबर से डीएपी नहीं है। किसान विनोद कुमार ने बताया कि खाद समितियों में खाद उपलब्ध न होने से प्राइवेट दुकानदार मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।
लाइन में लगकर ली खाद
शाहाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, डीएपी का वितरण होने से किसानों को थोड़ी राहत मिली। नवीन मंडी में इफको किसान सेवा केंद्र पर 1,200 बोरी डीएपी थी। इंतखाब साथ लाने पर किसान को दो-दो बोरी खाद दी गई। शाहाबाद देहात साधन सहकारी समिति पर 300 बोरी डीएपी थी। किसानों ने लाइन में लगकर डीएपी ली।
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इन जगहों पर नहीं मिली खाद, स्टॉक नहीं
आगमपुर समिति में स्टॉक नहीं था। संडीला प्रतिनिधि के अनुसार, कस्बा में बांगरमऊ रोड स्थित कृभको, हरदोई रोड स्थित पीसीएफ व क्रय-विक्रय केंद्रों पर डीएपी नहीं है। पीसीएफ सेंटर पर 30 अक्तूबर को डीएपी का वितरण किया गया था। अब स्टॉक नहीं है।
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26,000 बोरी डीएपी सोमवार को मिल गई है। सभी किसानों को तय मूल्य पर समितियों, संस्थाओं, पीसीएफ और विक्रय केंद्रों के माध्यम से खाद दी जाएगी। दो रैक डीएपी और जल्द ही मिलने की उम्मीद है। किसानों को रबी की फसलों के लिए डीएपी कम नहीं पड़ेगी। किसानों से अपील है कि वह जरूरत से अधिक डीएपी न खरीदें, ताकि दूसरे जरूरतमंद किसान को भी खाद मिलती रहे।
- मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी