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बेटे से आहत हुई ममता, पर मां बोली सजा न देना..

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हरदोई। रूह के रिश्तों की ये गहराइयां तो देखिए, चोट लगती है हमें और चिल्लाती है मां। बड़े होकर जितना भी दर्द क्यों न दें दे फिर भी बेटे को न मिले पीड़ा.. डरती है मां...। किसी कवि की कहीं गई पंक्तियां शुक्रवार को चरितार्थ होतीं दिखीं। बेटे व बहू की प्रताड़ना से क्षुब्ध एक मां रोते बिलखते थाने तो पहुंच गई और जाते जाते यह भी कह गई कि समझा देना कोई सजा न देना। इन शब्दों को सुनकर खाकी वाले भी बोल ही उठे मां तो आखिर मां ही होती है....।
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कई बार कम पढ़े लिखे लोग अपनी फरियाद लेकर थाने में आने तक से कतराते हैं। उन्हें लगता था वहां जाकर किससे मिलेंगे, किससे अपनी बात कहेंगे। हो सकता है उनकी बात भी न सुनी जाए। इन्हीं सब शंकाओं के समाधान के लिए आला अधिकारियों के निर्देश पर जिले के समस्त थानों में एक हेल्प डेस्क व्यवस्थित कर दी गई है। जहां एक महिला आरक्षी मौजूद रहती हैं जो लोगों की समस्याएं सुन उसका निराकरण करवाती है। शुक्रवार की सुबह रोज मर्रा की तरह ही आरक्षी सविता हेल्प डेस्क पर मौजूद थी। तभी हरियावां की ग्राम उतरा निवासी एक वृद्धा पहुंच गई। अपनी बात कहने में पहले वह सकुचाई तो आरक्षी ने उसे चाय पिलाई और उसको बात कहने के लिए समझाया। तब उसने बताया कि उसका पुत्र व बहू उसके साथ मारपीट करता है। मारपीट से तंग आकर थाने आने को विवश हुई। आरक्षी सविता ने उनकी समस्याओं को सुना व निराकरण करने का भरोसा दिया। पर जाते-जाते जब वृद्धा यह बोल कर गई कि साहब! बच्चों को समझा बुझा देना कोई सजा मत देना...। इन शब्दों को वहां मौजूद जिसने भी सुना बस एक ही बात कही कि यह होती है मां...।
मां जानती थी कि बेटे को हो सकती सजा
हरदोई। बुजुर्ग मां जानती थी कि यदि कोई बेटा अपने माता पिता को तंग करता है तो शिकायत पर उसको सजा हो सकती है यही जानकर जाते जाते उसने यह कहना उचित समझा कि समझा देना समझ जाएगा। सजा न देना। सजा देने से उसके बेटे व बहू को पीड़ा हो सकती है।
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छह माह की हो सकती सजा
हरदोई। किसी बुजुर्ग को यदि उनके बेटे तंग करें या मारे पीटे तो उन्हें छह माह की सजा के साथ जुर्माना भगी हो सकता है।
रजिस्टर में नाम किए जाते हैं दर्ज
हरदोई। थानों में अब बिना किसी काम के घूमना या जाना भी अब मुश्किल है। हेल्प डेस्क का काम एक काम यह भी है कि जो भी थाने जा रहा है उसका नाम व पता साथ ही काम भी नोट किया जाए। इसको लेकर बकायदा थानों पर हेल्प डेस्क पर रजिस्टर भी बना हुआ है।
क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूं
हरदोई। थानों पर सभी जगह हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश दे दिए गए हैं। सभी थानों में यह हेल्प डेस्क काम करना भी शुरू हो गई है। कि सी भी पीड़ा को लेकर यहां पहुंचने वाले लोगोंा को हेल्प डेस्क पर एक बोर्ड भी दिखेगा क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूं...। अधिकांश थानों में यह पट्टिकाएं बन गई हैं। जहां नहीं लगी हैं वहां भी जल्द लगाने के निर्देश हैं।
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