प्रतापनगर (हरदोई)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुके हैं, लेकिन जिले में हालात इसके विपरीत हैं। अधिकांश गांवों में शौचालयों का निर्माण अधूरा पड़ा है। अहिरोरी विकास खंड की ग्राम पंचायत करीमनगर जलालपुर में तो हालात और गंभीर हैं। यहां पात्रों के खाते में पैसे तो नहीं पहुंचे बल्कि प्रधान के पुत्र ने पीली ईंटें और दो बोरी सिमेंट देकर शौचालय निर्माण कराने को कह दिया। ऐसे में कहीं शौचालय अधूरे पड़े हैं तो कहीं ये गिरने वाले हैं। लोग इन शौचालयों का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं और खुले में ही शौच जाने को मजबूर हैं।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत चयनित पात्रों को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दो बराबर किस्तों में दिए जाते हैं। शौचालय निर्माण का बजट ग्राम पंचायत के खाते में भेजा जाता है। ग्राम प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी होती है कि पात्रों के बैंक खातों में ग्राम पंचायत के खाते से धन स्थानांतरित करें। करीमनगर जलालपुर में कुछ पात्रों के खातों में बजट स्थानांतरित किया गया, लेकिन फिर प्रधान के पुत्र ने लाभार्थियों से ये रुपये ले लिए। रुपये लेने के बाद संबंधित लोगों के घरों पर सात सौ पीलीं ईंटें और दो बोरी सीमेंट व थोड़ी बालू डलवा दी। नतीजा यह हुआ कि अधिकांश शौचालय अधूरे ही पड़े हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीमनगर जलालपुर में 311 शौचालयों का निर्माण होना था। दावा है कि सभी शौचालयों का निर्माण हो गया है, लेकिन मौके पर पहुंचते ही हकीकत सामने आ जाती है। एलओबी (वंचित परिवारों) के तहत 60 शौचालयों का निर्माण होना था। 311 शौचालयों के लिए मिले 37 लाख 32 हजार रुपये ग्राम पंचायत के खाते से आहरित हो चुके हैं। 60 शौचालयों के निर्माण के लिए मिले 3 लाख 60 हजार रुपये आहरित हो चुके हैं, जबकि इतना ही रुपया ग्राम पंचायत के खाते में जमा है।
60 शौचालय ही अधूरे : वीडीओ
ग्राम विकास अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि 311 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसका पूरा बजट भी खर्च हो गया है। वंचित परिवारों के 60 शौचालय अधूरे हैं। इनका निर्माण कराया जा रहा है।
प्रकरण 1 : अहिरोरी विकास खंड की ग्राम सभा करीमनगर जलालपुर निवासी कढ़िले ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए छह हजार रुपये खाते में आए थे। रुपये निकालकर प्रधान पुत्र को दे दिए। प्रधान पुत्र ने 700 पीली ईंटें और दो बोरी सीमेंट दे दी। जैसे-तैसे आधा शौचालय बना और ये भी कभी भी गिर सकता है।
प्रकरण- 2 : करीमनगर जलालपुर की ही रहने वाली रेशमा पत्नी ओमकार ने बताया कि प्रधान पुत्र ने 700 पीली ईंटें और दो बोरी सीमेंट और बालू घर के बाहर डलवा दी। फिर मिस्त्री आया और शौचालय निर्माण शुरू हुआ। खाते में पैसा नहीं आया। शौचालय भी अधूरा पड़ा है।
प्रकरण- 3 : इसी गांव के छुटकन्ने पुत्र पहलू ने बताया कि छह माह पहले प्रधान पुत्र ने शौचालय का निर्माण कराया था। शौचालय अधूरा पड़ा है। अधूरे शौचालय में लगाया गया पल्ला टूट चुका है। टैंक के लिए गड्ढा खुदा है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं।