हरदोई। कम समय और लागत के साथ ही मुनाफा देने वाली मक्का की फसल का रकबा तीन साल में तीन गुना बढ़ गया।
खरीफ फसल में 60,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मक्का बुआई की तैयारी है। किसान खरीफ के साथ ही जायद फसल में भी मक्का की बुआई करते हैं। खरीफ फसल की बुआई से पहले यह मक्का तैयार हो जाती है। इससे इसके भुट्टा किसानों के लिए खरीफ फसल से अधिक लाभकारी साबित होते हैं। मुख्यमंत्री का मक्का फसलों का हवाई सर्वेक्षण संभावित है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली मक्का फसल के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हो रही है। तीन साल में तीन गुना क्षेत्रफल बढ़ा है। खरीफ के साथ ही जायद में किसान मक्का फसल की बुआई करते हैं। जिले में मल्लावां, माधौगंज, शाहाबाद आदि क्षेत्रों में जायद में भी मक्का की फसल की जाने लगी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जायद में करीब 5,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का बुआई हुई है। खरीफ फसल में मक्का की बुआई भी शुरू हो गई है। किसानों ने मक्का फसल को कैश क्राॅप के रूप में किया जाना शुरू किया है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश कुमार पाठक ने बताया कि वर्तमान में 60,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर मक्का बुआई का लक्ष्य रखा गया है। जबकि साल 2024 में 48,000 हेक्टेयर और साल 2023 में 20,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर मक्का बुआई हुई थी। बताया कि शंकर प्रजाति में हाईब्रिड और बेबी कॉर्न मक्का किसान की पसंद है। इसकी बाजार में भी मांग रहती है। सरकारी कृषि स्टोर पर 15,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बीज पर किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है।
एथेनाल में उपयोग होने से बढ़ी मक्का की खपत
एथेनाल में मक्का के उपयोग से मांग बढ़ी है। मांग बढ़ने से भाव भी अच्छा मिलता है। संडीला में एथेनाल फैक्टरी के साथ ही जिले की मक्का शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद जनपद भी जाती है। एथेनाल में उपयोग से फैक्टरी संचालक किसान बुआई से पहले ही मक्का फसल, पत्ती और डंठल आदि की खरीद का अनुबंध कर लेते हैं। इससे किसानों को फसल की बिक्री की गारंटी मिल जाती है। साथ ही जायद और खरीफ फसलों में मक्का फसल की बुआई से कृषि विविधिकरण को भी बढ़ावा मिलता है।