हरदोई। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की गई। मंदिरों के कपाट बंद रहे लेकिन घरों में घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। विश्व से कोरोना जैसी महामारी को दूर करने की मां से प्रार्थना की गई।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं। जो प्रसन्न होने पर भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का वरदान देती है। इनकी कांति व आभा सूर्य के समान प्रकाशमान है।
उन्होंने बताया कि कूष्मांडा देवी ने ही सृष्टि का विस्तार किया। भगवती माता का ये स्वरूप अन्नपूर्णा का है। प्रकृति का दोहन और लोगों को भूख प्यास से व्याकुल देखकर मां ने शांकभरी का रूप धरा। शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया।