फोटो-02- जिंदपीर चौराहा के पास गैस एजेंसी के बाहर लगी उपभोक्ताओं की लाइन। संवाद
हरदोई। खाड़ी देशों में भले ही युद्ध विराम की घोषणा हो लेकिन घर चलाने के लिए आम उपभोक्ता और दुकानदार परेशान हैं। एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति और डिलीवरी, ई-केवाईसी, पर्ची की समस्या ने उपभोक्ताओं और दुकानदारों की दिनचर्या बदल दी है। आम उपभोक्ता सुबह से ही सिलिंडर की डिलीवरी के लिए गैस एजेंसियों पर लाइन में लगने को मजबूर है। वहीं, दुकानदार रोजी-रोटी के लिए लकड़ी, कोयला और भट्ठी तक सिमट कर रह जा रहे हैं।
युद्ध से पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन पर पड़े असर का आम उपभोक्ताओं और दुकानदारों पर प्रभाव दिख रहा है। व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की एक माह से अधिक अवधि होने पर न तो आपूर्ति हुई और न ही उपभोक्ताओं को डिलीवरी मिल पा रही है। ऐसे में दुकानदारों को लकड़ी-कोयला और डीजल की भट्ठी पर काम करना पड़ रहा है। आम उपभोक्ताओं को रसोई में चूल्हा जलता रहने के लिए घरेलू एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग, पर्ची और डिलीवरी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
इससे आम उपभोक्ताओं की दिनचर्या बदल गई है। एक अदद एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति के लिए गैस एजेंसियों के कार्यालयों के चक्कर लगाना और लाइन में लगना मजबूरी हो गया है। इससे गैस एजेंसियों के कार्यालयों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुट रही है। अपनी बारी के इंतजार में उपभोक्ताओं को लाइन में लगना पड़ रहा है।
व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर न मिलने से कैटरिंग व्यवसाय के साथ ही ठेला और रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाकर गृहस्थी चलाने वाले दुकानदारों को अतिरिक्त खर्च कर लकड़ी और कोयला खरीदना पड़ रहा है। रेहड़ी-पटरी पर ठेला आदि लगाने वाले दुकानदारों ने रोजी-रोटी चलाने के लिए अब फिर से भट्ठी का सहारा लिया है। इससे होने वाले धुएं के कारण खाद्य सामग्री बनाने के लिए भट्ठी में पूरी तरह से आग तैयार होने का भी इंतजार करना पड़ता है।
फोटो-02- जिंदपीर चौराहा के पास गैस एजेंसी के बाहर लगी उपभोक्ताओं की लाइन। संवाद
फोटो-02- जिंदपीर चौराहा के पास गैस एजेंसी के बाहर लगी उपभोक्ताओं की लाइन। संवाद