हरदोई। सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरोध में बुधवार को केंद्रीय श्रम संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल रही। इस कारण जिले की करीब 100 बैंक शाखाओं में ताले लटकते रहे। इसमें करीब 70 करोड़ का लेनदेन और 15 हजार ग्राहक प्रभावित हुए।
बुधवार को हड़ताली बैंककर्मी सिंडीकेट बैंक की अस्पताल मार्ग शाखा पर एकत्र हुए और प्रदर्शन कर नारेबाजी की। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की स्थानीय इकाई के बैनर तले हुए विरोध प्रदर्शन में यूनियन के जिला मंत्री आरके पांडेय ने बैंक हड़ताल को सफल बताया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग उद्योग के पांच संगठन इस हड़ताल में शामिल रहे। यूनियन अध्यक्ष वेदप्रकाश पांडेय ने कहा कि हड़ताल कामगारों के मांगपत्र के समर्थन में है। बैंककर्मी संगठन कथित अवांछित बैंकिंग सुधारों और विलय के विरोध में हैं।
संयुक्त मंत्री अजय मेहरोत्रा ने कहा कि वेतन पुनरीक्षण एवं संबंधित मुद्दों को शीघ्र हल किया जाए। सेंट्रल बैंक अधिकारी संगठन के दीपक त्रिपाठी ने कहा कि बैंकों में पर्याप्त भर्ती की जाए ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। महिला बैंककर्मी नेता यूनियन की उपाध्यक्ष वर्षा मेहरोत्रा ने कामगार विरोधी श्रम कानूनों को रोकने की मांग की। हड़ताल का पंजाब नेशनल बैंक सहित 100 बैंक शाखाओं में असर दिखा। प्रदर्शन में दीपक बाजपेई, अनुज सिंह, सत्यपाल यादव, वीरबहादुर, वरुण सिंह, अनादि ब्रह्म, साधना देवी, देवेंद्र कुमार, रिषीपाल, राजेश कुमार, संदीप, चंदन, एसपी सिंह, प्रकाश आदि शामिल रहे।
30 करोड़ की क्लीयरिंग फंसी
हरदोई। हड़ताल के कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में रोजाना होने वाली क्लीयरिंग के जरिए बैंकों का आपसी लेनदेन ठप रहा। करीब 30 करोड़ की क्लीयरिंग प्रभावित रही। कई बैंकों के तो ताले ही नहीं खुले तो कई के शटर आधे ही खुले। कई बैंकों में स्टाफ न होने से कामकाज ठप रहा।
यहां हुआ काम
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की स्थानीय इकाई के जिला मंत्री आरके पांडेय ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं थीं। यहां सामान्य कामकाज हुआ। प्राइवेट बैंकों में भी रोज की तरह काम हुआ।
बीएसएनएल कर्मी बोले, केंद्र सरकार निजी कंपनियों के हाथों की कठपुतली
हरदोई। बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने भी सिविल लाइन स्थित एक्सचेंज पर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। जिला सचिव कामरेड वाईपी गुप्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार निजी कंपनियों के हाथों की कठपुतली है। इसलिए उसने श्रम संगठनों के न्यूनतम वेतन की मांग को ठुकरा दिया। कारपोरेट घरानों का टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 15 से 22 प्रतिशत कर दिया। कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण कर्मचारी और गरीब होता जा रहा है। इस दौरान पेंशनर्स यूनियन के जिला सचिव शिवमंगल प्रसाद दीक्षित सहित काफी संख्या में पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।