हरदोई। जिले में एक महीने से उत्पात मचाए तेंदुए ने बुधवार रात शहर से सटे अनंगबेहटा गांव में घुसकर घर के बाहर बंधी बछिया का शिकार कर लिया। घर के बाहर से खेतों तक तेंदुए के पंजे के निशान मिले हैं। सुबह गांव पहुंची वन विभाग की टीम ने पंजों के निशान और शिकार करने के तरीके को देखकर जानवर के तेंदुआ होने की पुष्टि की। गांववालों का अनुमान है कि तेंदुआ दुधवा नेशनल पार्क से आया है। दहशत में भरे लोग भीषण गर्मी के बावजूद गुरुवार रात कमरों में ही सोए।
शहर के पिहानी चुंगी से करीब चार किलोमीटर दूर अनंगबेहटा गांव के किनारे सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर अवधेश शरण त्रिपाठी का मकान है। उनके पास दो गाय और तीन बछिया हैं। बुधवार रात ये जानवर घर के बाहर बंधे थे। परिवार के लोग घर में सो रहे थे। रात करीब साढ़े 12 बजे अवधेश के बड़े पुत्र प्रवीण कुमार कुछ आहट पाकर बाहर निकले तो दरवाजे से कुछ दूर बंधी छह माह की बछिया मरी पड़ी थी। उसका पेट फटा था।
प्रवीण ने बताया कि उसी दौरान उन्होंने घर के बाहर बायीं तरफ खुले स्थान की ओर किसी जंगली जानवर को भागते देखा।
दहशत में उन्होंने शोर मचाया तो परिजन बाहर आ गए। कुछ ही देर में पूरे गांव में सूचना फैल गई। रात करीब तीन बजे वन रेंज कार्यालय को सूचना दी गई। वन रेंज अधिकारी विक्र म सिंह सचान व उप वन रेंज अधिकारी रत्नेश श्रीवास्तव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बछिया के शव को बारीकी से देखा। परिसर में हमलावर जानवर के पंजे के निशान तलाशे।
पंजों को पटरी से नापने के बाद अधिकारियों ने तेंदुआ होने की पुष्टि की। वन विभाग ने गुरुवार देर शाम गांव में पिंजड़ा रखवा दिया। पिंजड़े में कुत्ते का पिल्ला बांधा गया है। डीएफओ अतुल अस्थाना ने बताया कि वन विभाग की टीम को अलर्ट किया गया है। साथ ही ग्रामीणों से भी सचेत रहने को कहा गया है।
हर 15 दिन बाद तेंदुए की दहशत जिले में दिख रही है। सबसे पहले बेहटा गोकुल के गांव पिपरी में दहशत फैलाने के ठीक 15 दिन बाद शाहाबाद के गढ़ीचांद में तेंदुए को देखा गया। अभी वन विभाग चैन की सांस ले भी न पाया था कि तेंदुए ने 15 दिन का समय पूरा कर एक बार फिर अनंगबेहटा में शिकार कर अपनी दहशत फैला दी है। कुल मिलाकर जिले के लोग यह मान चुके हैं कि यह वही तेदुआ हैं जो वन विभाग की पकड़ से दूर पूरे जिले में स्थान बदल बदलकर दहशत फैला रहा है।
वन विभाग के मुताबिक पिछले माह 11 अप्रैल को हरदोई वन रेंज में ही आने वाले गांव पिपरी में तेंदुए ने हमला कर करीब पांच को घायल कर दिया था। जिसके बाद वन विभाग सहित वाइल्ड लाइफ की टीम भी मौके पर डेरा डाले रही लेकिन वह पकड़ से दूर हो गया।
इसके बाद वन विभाग ने यह कह दिया कि तेंदुआ निकल गया है। जिसके 15 दिन बाद 25 अप्रैल की रात एक बार फिर शाहाबाद के गढ़ी चांद में तेंदुए ने खुद को दिखाकर ग्रामीणों में दहशत फैला दी। वहां भी पिंजड़ा लगाया गया लेकिन वह नहीं मिला।
यहां भी रास्ता देख वन विभाग ने कह दिया वह निकल गया लेकिन ठीक 15 दिन बाद एक बार फिर बुधवार की रात शहर की सीमा से सटे अनंगबेहटा गांव में ही शिकर कर जिले में ही खुद के मौजूद होने का सबूत दे गया है। नहर के किनारे-किनारे सटे उक्त तीनों गांवों को देखकर लोगों ने अंदाजा लगाना शुरू कर दिया है कि यह वही है जो वन विभाग के हाथों में नहीं आ पा रहा है और दहशत फैला रहा है।
डीएफओ अतुल अस्थाना ने बताया कि 15 दिन में यही तेंदुआ दहशत फैला रहा ये तो नहीं कह सकते लेकिन ये तो सच है एक पखवारे के बाद ही जानवर के बाहर निकलकर दहशत फैलाने के तथ्य हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक उनकी जानकारी में नहीं है कि तेंदुए के अंदर आखिर यह गुण भी होता है कि 15 दिन बाद वह आबादी की ओर भाग रहा है।