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रात में फिर शहब्दा में दहशत फैला गया तेंदुआ

Sat, 12 Aug 2017 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
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माधौगंज के शहाब्दा में शनिवार की सुबह एक बार फिर देखे गए पद चिह्न। - फोटो : amarujala
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हरदोई/माधौगंज। माधौगंज थाना क्षेत्र के शहब्दा गांव में गुरुवार रात एक गाय को शिकार बनाने के बाद तेंदुए के पद चिह्न दूसरे दिन भी उसी गांव के इर्द गिर्द दिखाई दिए तो ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने गांव के आसपास के खेत खंगाले लेकिन उसका कहीं पता नहीं लगा। पद चिह्न जरूर मिले। वन विभाग ने क्षेत्र में लगातार कांबिंग करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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माधौगंज के शहब्दा गांव में गुरुवार को कुंज बिहारी की गाय को एक जंगली जानवर ने अपना शिकार बनाया था। घटना स्थल के इर्द गिर्द जंगली जानवर के पद चिह्न भी मिले थे। वन विभाग की टीम पद चिह्नों को देखकर तेंदुआ होने की पुष्टि अभी ठीक से कर भी न पाई थी कि शनिवार सुबह फिर से ग्रामीणों में तेंदुए के नए पद चिह्न देख खलबली मच गई। कुंज बिहारी के घर के पीछे ही तेंदुए के नए पद चिह्न देखे गए जिस पर लोगों ने प्रधान को सूचना की।

प्रधान कृष्ण पाल सिंह ने बिलग्राम रेंजर एके सचान व बीट प्रभारी शिव मिलान शुक्ला को सूचना दी। यही नहीं ग्रामीणों ने जब गांव भर में पंजों की तलाश की तो गांव के सोबरन, महेश के घर के पीछे भी नए पद चिह्न मिले। गांव के विजेंद्र, हरिश्चंद्र ,अमरनाथ ने बताया कि बढ़ईया तालाब पर पद चिह्नों के निशान देखे गए। दूसरे दिन भी वन विभाग के रेंजर एके सचान व पुलिस फोर्स ने  खेत के साथ साथ अन्य दूर दूर तक गांव खंगाल डाले लेकिन तेंदुआ का पता नहीं लगा। उन्होंने बताया कि कांबिंग लगातार जारी रहेगी, ग्रामीण एहतियात बरतें। उन्होंने बताया कि रविवार को वृहद रूप से अभियान चलाया जाएगा।
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लाख कहें अधिकारी दहशत तो रहेगी
 ग्रामीण सोबरन, सुभाष आदि का कहना है कि अधिकारी तो यह कहकर यहां से निकल जाएंगे कि तेंदुआ यहां से निकल गया लेकिन ग्रामीण इस बात को कैसे मान लेंगे उनकी तो जान सांसत में फंसी है।  

पशुओं को अकेले नहीं छोड़ रहे
बच्चों व महिलाओं को ही नहीं तेंदुआ का खौफ इस कदर का है कि मवेशियों तक को अकेले पशुपालक नहीं जाने दे रहे हैं। लाठी-डंडों केे साथ एकजुट होकर पशुपालक अपने दुधारू पशुओं को चराने के लिए खेतों पर ले जाने के लिए मजबूर हैं।

बंद करवा दी पढ़ाई
 तेंदुए के खौफ का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अधिकांश अभिभावक गांव से ही सटे प्राइमरी व एक निजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने का मन नहीं बना पा रहे हैं। अभिभावकों का मानना है कि वह सभी संतुष्ट हो जाएं कि वह सचमुच निकल गया है उसके बाद ही वह अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेजेंगे।
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