हरदोई/माधौगंज। माधौगंज के शहाब्दा गांव पहुंचे तेंदुए ने गांव में घर के बाहर बंधी गाय के कानों पर पंजे मारकर उसको अपना शिकार बनाया। दूसरे जानवरों को वह अपना शिकार बना पाता इससे पहले ही घर के लोगाें की आहट पाकर वह भाग निकला। घटनास्थल के इर्द-गिर्द गीली मिट्टी होने से कई जगह उसके पंजों के निशान मिले हैं। ग्रामीणों की सूचना पर सुबह पहुंची वन विभाग की टीम ने भी मृत मवेशी व पंजों का निशान देख तेंदुए का ही बताया।
माधौगंज क्षेत्र के शहब्दा गांव में कुंज बिहारी का परिवार रहता है। उनके घर के बाहर ही छप्पर पड़ा हुआ है और उसके नीचे गाय बंधी थी। रोजमर्रा की तरह ही घर के बाहर परिसर में उन्हें बांध दिया गया और वह सभी सो गए। बकौल कुंज बिहारी रात को करीब तीन बजे उसे किसी जानवर की आवाज तो सुनी थी लेकिन वह इस पर कोई ठीक से ध्यान नहीं दे पाए लेकिन सुबह जब वह घर के बाहर निकले तो गाय की हालत देखते ही उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया।
उसके घर के बाहर गाय के दोनों कान कटे हुए थे और वह मृत पड़ी थी। कुछ ही देर बाद पूरे गांव में यह सूचना पहुंच गई और ग्रामीण घर के बाहर एकत्र हो गए। प्रधान कृष्ण पाल सिंह ने वन रेंज कार्यालय पर इसकी सूचना दी। जिसके बाद वन दरोगा महेश कुमार, माधौगंज बीट इंचार्ज शिव मिलन शुक्ला और माली रमेश कुमार मौके पर पहुंचे। तब तक ग्रामीणों ने जंगली जानवर के पंजों के निशान को खोज रखा था।
घटनास्थल के आस- पास एवं गांव के बाहर तक जानवर के आने व जाने दोनों के ही निशान मिले। गांव निवासी संतोष कुमार ने वन अधिकारियों को बताया कि सुबह जब वह शौच के लिए गए थे तब पास के मक्का खड़ी खेत से किसी जानवर की गुर्राहट भरी आवाज सुनाई दी। जिसके बाद वह उधर से भाग निकला। डीएफओ राकेश चंद्रा ने बताया कि जंगली जानवर के होने की पुष्टि तो हुई है पंजों के निशान मिले हैं जिनकी फोटो विशेषज्ञों के पास भेजकर जंगली जानवर की पुष्टि की जा रही है। बताया कि प्रथम दृष्टया पंजे के निशान तेंदुए के ही लग रहे हैं।
पूरब से आया था, उत्तर की ओर गया
वन विभाग व ग्रामीणों को जंगली जानवर के आने के निशान गांव की ओर पूरब खेत की तरफ से मिले हैं। जबकि उसके जाने के उत्तर दिशा में। ग्रामीणों की मानें तो जंगली जानवर जो भी रहा हो वह बढ़ईया तालाब की तरफ से ही निकला होगा।
मिले पंजों के निशान
वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पद चिंहों की नाप ली जिसमें कहीं-कहीं 9 बाई 7 सेंटीमीटर और कहीं-कहीं 6 बाई 5.5 सेंटीमीटर के निशान मिले। वन विभाग के बीट इंचार्ज शिव मिलन शुक्ला ने बताया जहां जमीन गीली है तो वह पंजों के निशान बड़े मिलते हैं, जिसके चलते इतना तो कहा जा सकता है कि पंजे तेंदुए के हैं ही। फिर भी वाइल्ड लाइफ की टीम को पंजों की फोटो भेजी गई है।
खौफजदा लोगों ने खुद को किया कैद
ग्रामीणों का कहना है कि दहशत इस तरह है कि शुक्र वार की रात जब से लोगाें ने बछिया का हश्र देखा है तब से सो नहीं पाए हैं। असुरक्षा की भावना लोगों में घर कर गई है जिसके बाद लोग अपने आप को घरों में कैद हैं। अपने अपने जानवरों को भी लोगों ने घरों में ही नजर बंद कर लिया है।
चील-कौए बताते हैं कि नीचे तेंदुआ है
डीएफओ राकेश चंद्रा ने बताया कि खेतों या जंगल में कहीं भी यदि तेंदुआ या इसी नस्ल का कोई जानवर होता है तो आसमान में चीलें या फिर कौए उड़ते नजर आते हैं। जिसको देखकर भी ग्रामीण अंदाजा लगा सकते हैं कि आसपास कहीं तेंदुआ है।
पेड़ों पर कम ऊंचाई की छतों पर चढ़ता है तेंदुआ
डीएफओ राकेश चंद्रा ने बताया कि ऊंचाई पर चढ़ने वाला यह जानवर है। यह पेड़ पर व कम ऊंचाई वाले घरों पर भी चढ़ सकता है। इसलिए ग्रामीण इस बात को भी ध्यान में रखकर एलर्ट रहें।
अब तक इन गांवों में दहशत फैला चुका तेंदुआ
बेहटागोकुल का पिपरीपुर में 11 अप्रैल, शाहाबाद का गढ़ीचांद में 25 अप्रैल, शहर से एक कि लोमीटर दूर अनंगबेहटा में 10 मई, अनंगबेहटा के नजदीक ग्राम चक में 11 मई, सांडी का भीखपुर में 17 मई, हरपालपुर का परचौली में18 मई अनंगबेहटा के पास ही पोहरनपुरवा में 19 मई को तेंदुआ दहशत फैला चुका है।