हरदोई। एक फरवरी से मंडी में सभी काम ऑनलाइन किए जाने का आदेश प्रभावी हो गया है। आदेश प्रभावी होते ही शहर की नवीन गल्ला मंडी प्रशासन ने इसका अनुपालन कराना शुरू कर दिया है। इससे इतर नई व्यवस्था मंडी परिसर में काम करने वाले कई व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। उनका कहना है कि बड़े व्यापारी तो संसाधन जुटा कर काम कर लेंगे, लेकिन उनके जैसे छोटे व्यापारियों के लिए संसाधन जुटाना और बिना दक्षता के ऑनलाइन काम करना खासा मुश्किल है।
पारदर्शिता लाने व डिजिटलाइजेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने एक फरवरी से गल्ला कारोबार से जुड़ी मंडी की सभी व्यवस्थाएं/कार्य ऑनलाइन कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत मंडी आने वाले किसानों को गेट पर ही ऑनलाइन प्रवेश पर्ची जारी की जा रही है। व्यापारी भी अपनी आईडी से ऑनलाइन 6-आर व 9-आर काटेंगे व गेट पास के लिए प्रपत्र अपलोड करेंगे।
आदेश जारी होने के बाद व्यापारियों को आईडी मुहैया कराने के साथ ही मंडी प्रशासन ने इसका अनुपालन शुरू करा दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी मंडी प्रशासन और व्यापारियों का आपस में तारतम्य नहीं बन पा रहा है।
व्यापारी नई व्यवस्था को लेकर खासे असमंजस में हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में पांच सौ से अधिक पंजीकृत व्यापारी हैं। इसमें से कुछ बड़े व्यापारी हैं जिन्हें कोई परेशानी नहीं होनी है। असल परेशानी छोटे व्यापारियों को हो रही है। पहले तो ऑनलाइन काम करने के लिए वे दक्ष नहीं हैं।
कार्य कराने के लिए कोई दक्ष कर्मचारी लगाते हैं तो उसे रुपये देने होंगे। यही नहीं ऑनलाइन काम कराने के लिए लैपटॉप व नेट का भी खर्च उठाना पड़ेगा, जो छोटे व्यापारियों के मुश्किल है। व्यापारियों ने कहा कि सरकार को ऑनलाइन व ऑफलाइन, दोनों तरह से काम करने के विकल्प खोल देने चाहिए।
किसानों से जमा कराए जाएं असल अभिलेख
नई व्यवस्था के फेर में उलझे मंडी व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में काम करना मुश्किल है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी भरा है अंजाने में गड़बड़ी के फेर में फंसना है। बताया कि अमूमन किसान अपना नाम व पता बताता था, जिसके आधार पर व्यापारी उससे खरीद करता था। अब व्यापारी इससे बचना चाहते हैं, व्यापारियों की मांग है कि गेट पर प्रवेश के वक्त ही किसान से इंतखाब, आईडी व खाता संख्या लिया जाए, जिससे व्यापारी उन्हीं अभिलेखों के आधार पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकें।
मंडी व्यापार मंडल के महामंत्री हरिश्याम गुप्ता ने बताया कि मंडी में लगभग पांच सौ आढ़ती हैं, जो काम चलाने भर का कारोबार करते हैं। ऑनलाइन काम करने के मामले में लगभग सभी अकुशल हैं। ऐसे में अगर उन्हें ऑनलाइन काम करना ही पड़ा तो इसके लिए पहले उन्हें अतिरिक्त संसाधन जुटाने होंगे। इसके साथ ही काम करने के लिए वेतन पर एक दक्ष कर्मचारी भी रखना होगा।
मंडी के व्यापारी श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि अभी मंडी स्तर पर ही व्यवस्था का सही ढंग से अनुपालन शुरू नहीं कराया जा सका है। सरकार को इसमें कुछ छूट देनी चाहिए। जब तक शत प्रतिशत व्यापारी संसाधन जुटाकर दक्ष नहीं हो जाते, तब तक उन्हें ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह से काम करने का विकल्प दिया जाए। इससे इतर मंडी प्रशासन को व्यापारियों के लिए वाईफाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित करानी चाहिए।
तय किया जाएगा आवक प्रवेश का समय
मंडी सचिव बबलू लाल ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं ऑनलाइन कर दी गईं हैं। उस पर काम भी शुरू करा दिया गया है। व्यापारियों की ओर से जो भी समस्याएं बताई जा रहीं हैं, उनका निस्तारण कराया जा रहा है। वर्तमान समय में केवल पुराने स्टॉक की निकासी का काम ही ऑफलाइन हो रहा है। प्रवेश पर्चियां भी ऑनलाइन जारी की जा रहीं हैं। इसमें कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए मंडी में आवक के प्रवेश का समय निर्धारित किया जाएगा।
मंडी में व्यापारियों के फड़ पर लगे अनाज के बोरे। संवाद- फोटो : HARDOI
मंडी सचिव कार्यालय। संवाद- फोटो : HARDOI
हरिश्याम गुप्ता। संवाद- फोटो : HARDOI