हरदोई। श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को आचार्य ने बताया कि संतों की महिमा से व्यक्ति को हर परिस्थिति में भगवान की भक्ति प्राप्त हो जाती है। भगवान की भक्ति में रंगने के बाद मान, अपमान, सुख व दुख से दूर व्यक्ति अपने प्रभु का गुणगान करते रहते हैं और वही उनके जीवन का लक्ष्य बन जाता है।
श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य संतोष भाई जी ने कहा कि मृत्यु आने से पहले संसारी व्यक्ति कई बार हानि, अपमान, वियोग के भय से मृत्यु के समान कष्ट पाता है। बताया कि शुकदेव भगवान जैसे सद्गुरु की प्राप्ति हो जाए तो मनुष्य मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।
राजा परीक्षित ने संत के गले में मृत सांप डाल दिया तो उन्हें इस कर्म का फल भुगतना पड़ा लेकिन संत का श्राप भी ईश्वर की भक्ति का साधन ही बन गया। भक्ति का फल केवल ईश्वर दर्शन है। भक्ति का प्रभाव ऐसा है कि भगवान स्वयं भक्त के लिए दौड़े चले आते हैं। आचार्य प्रवर ने सुलभा महारानी और कपिल भगवान का व्याख्यान सुनाया। मन की चंचलता के बारे में बताया कि उसका नियंत्रण अभ्यास और वैराग्य से संभव है।
माता अनुसुइया की कथा सुनाते हुए कहा कि पति की सेवा करते हुए उन्होंने गंगा जी को अपने घर में प्रकट करा दिया। स्त्रियों को अपने पति की बात मानने का संदेश दिया और बताया कि माता सती ने भगवान शिव की बात नहीं मानी तो उन्हें पश्चात की अग्नि में जलना पड़ा। उन्होेंने तमाम प्रसंगों को सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस मौके पर राकेश अग्रवाल, एसपी सिंह, नरेश जौहरी, विनोद मेहरोत्रा, अवध बिहारी, दिलीप गुप्ता, गुड्डू, रेखा श्रीवास्तव आदि मौजूद रहें।