जिले में सड़क हादसों का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता ही
जा रहा है। आलम यह है कि 146 दिनों में 138 लोगों की सड़क हादसोें में जान
चली गई, जबकि पूरे जिले में इतने दिनों में करीब 2000 लोग घायल भी हुए
हैं। जिनका उपचार जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में कराया गया।
घटना के
पीछे प्रमुख वजह यातायात कानूनों का सख्ती से पालन न होना माना जा रहा है।
अधिकांश घटनाओं में वाहन चालक के नशे में होने के मामले भी सामने आए हैं।
इसके बावजूद भी पुलिस वाहन चेकिंग के नाम पर केवल खानापूरी कर पल्ला झाड़
लेती है। वाहन चालकों का ब्रीथ एनालाइजर से चेक भी नहीं किया जाता है।
इतना ही नहीं कृषि कार्य के लिए जो वाहन चलाए जा रहे जैसे
ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आदि पर सवारियां ढोई जा रही हैं। वहीं कई मार्गों पर
टेंपो और और पिक प डाला चालक भी मनमानी से वाहन चलाते हैं। इसके चलते अकसर
सड़क हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा मुख्य मार्गों में बनाए गए स्पीड ब्रेकर
भी ध्वस्त हो रहे हैं।
इन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही वजह हैं
कि सड़क हादसों का ग्राफ गत वर्षों के सापेक्ष बढ़ रहा है। शराब के नशे में वाहन चलाना कानूनन अपराध है, जिसको रोकने की जिम्मेदारी
पुलिस प्रशासन की है। शराब के नशे में चालक है या नहीं, इसकी जांच के लिए
विभाग के पास ब्रीथ एनालाइजर उपलब्ध हैं, पर उसका प्रयोग नहीं किया जा रहा
है।
इससे शराब पीकर वाहन चलाने वालों की संख्या बढ़ रही है, जो हादसे का
कारण भी बनते हैं। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए आए दिन पुलिस व यातायात विभाग की ओर
से चेकिंग अभियान चलाया जाता है, पर यह अभियान सिर्फ खानापूरी तक ही सिमट
कर रह जाता है।
यातायात निरीक्षक सिर्फ खानापूरी कर अपने कार्य की इतिश्री
कर लेते हैं। जिले में डग्गामार वाहनों में निर्धारित मानक से अधिक सवारियां ढोई जा रही
हैं। यह वाहन पुलिस थानाें और यातायात प्रभारी के सामने से गुजरते रहते
हैं, पर उनकी ओर देखना भी जिम्मेदार जरूरी नहीं समझते हैं। इससे दुघर्टनाएं
बढ़ रही हैं।