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खेतों में सड़ने लगा खीरा, तोड़कर फेंक रहे किसान

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बिलग्राम। कस्बे में पूरी तरह लॉकडाउन होने से खीरे की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि खेत में करीब एक माह पहले ही फसल तैयार हो गई थी लेकिन लॉकडाउन के कारण न तो थोक व्यापारी उनसे संपर्क कर रहे हैं और न ही किसान फसल बेचने आढ़तों तक पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में अब खीरे खराब होने लगे हैं। उन्हें खेतों में खराब खीरों को तोड़कर फेंकना पड़ रहा है।
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बिलग्राम तहसील क्षेत्र में कटरी के इलाके में तरबूज और खरबूज के साथ बड़ी संख्या में किसान खीरे की भी खेती करते हैं। खेतों का रकबा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन किसान इसमें इतनी उपज कर लेते हैं कि परिवार का भरण पोषण हो जाता है। बिलग्राम कस्बे में नौ अप्रैल से पूर्ण बंदी चल रही है। ऐसे में सब्जी की दुकानें और थोक की आढ़तें भी बंद हैं। आमतौर पर किसानों के पास थोक व्यापारी खुद ही पहुंच जाते थे और सौदा तय होने पर नगद भुगतान कर खीरा खरीद लेेते थे। लॉकडाउन के कारण इन दिनों हालात कुछ अलग हैं। किसान भी अपने खेतों से खीरे मंडी नहीं भेज पा रहे हैं। किसानों के मुताबिक लगभग 400 रुपये सैकड़ा के हिसाब से व्यापारी खीरा खरीद लेते थे, लेकिन इस बार अभी तक कोई व्यापारी नहीं आया।
किसानों ने बताया दुखड़ा
खीरा उत्पादक किसान मलिखे ने बताया कि बिलग्राम कस्बा पूरी तरह बंद है। कोई आढ़ती भी खीरा बाहर नहीं भेज पा रहा, इसलिए व्यापारी किसानों से संपर्क नहीं कर रहे, लेकिन झेलना किसानों को पड़ रहा है। एक माह पहले से ही फसल तैयार होने लगी थी। अब सुबह शाम खराब होने वाले खीरे तोड़कर फेंकने पड़ रहे हैं।
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सलीम का कहना है कि खीरा ज्यादा दिनों तक सहेजा नहीं जा सकता। अब खीरा तोड़कर बंदी खुलते ही जो भी दाम मिलेगा, उस पर कस्बे की ही मंडी में बेच देंगे। खेत में खीरा काफी दिनों से तैयार है और अब खराब होने लगा है। औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी है।
राजाराम कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण परेशानी तो हुई ही है, लेकिन कोई दूसरा विकल्प नहीं है। खेत में तैयार खीरा बंदी खुलने पर बिलग्राम कस्बे में ही बेच देंगे। बाहर से आने वाले व्यापारी भी इस बार कोरोना संकट की वजह से नहीं आ पाए।
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