फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: 4,975 ऋणधारक में 3,000 डिफाल्टर, 40 करोड़ रुपये का कर्ज फंसा

विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक से लघु और सीमांत किसानों को छह प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिए जाने की मुख्यमंत्री ने घोषणा की है।
विज्ञापन

वहीं, बैंक की तरफ से दिए गए लघु और सीमांत किसानों को कर्ज के रूप में रुपये डिफाल्टर खाता होने से फंसते जा रहे हैं। उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक की तरफ से 4,975 किसानों को करीब 53.69 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया जिसमें करीब 40 करोड़ रुपये डिफाल्टर खातों में फंस गए हैं।



उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक की जिला मुख्यालय सहित सात शाखाएं संचालित हैं। इसमें पिहानी, शाहाबाद, बिलग्राम, मल्लावां, कछौना और संडीला की शाखा भी शामिल हैं। जिला मुख्यालय सहित इन बैंक शाखाओं के खाताधारक लघु और सीमांत किसानों में से 4,975 किसानों ने बैंक से कर्ज लिया है। इन किसानों को 53 करोड़, 69 लाख, 38 हजार रुपये का कर्ज बैंक ने दिया है। बैंक की ब्याज दर सरकारी बैंकों और योजनाओं से अलग है। उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक में 11.50 प्रतिशत सालाना ब्याज दर वर्तमान में चलन में है। इसी ब्याज दर के हिसाब से कर्ज की गणना और वसूली की जाती है।
विज्ञापन


बताया गया कि 4,975 कर्जधारक किसानों में से करीब 3,000 किसानों की तरफ से समय से किस्त की अदायगी न किए जाने से खाते डिफाल्टर श्रेणी में चले गए हैं। इन किसानों के खातों में करीब 40 करोड़ रुपये का कर्ज फंस गया है। इसकी वसूली नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन




-

फैक्ट फाइल
. 4,10,000 लघु और सीमांत किसान।

. 4,975 लघु और सीमांत किसानों ने यूपीएलडीबी से कर्ज लिया।

. 53,69,38,000 रुपये यूपीएलडीबी ने ऋण वितरित किया।
. 1,975 किसान समय से कर्ज की कर रहे अदायगी।

. 3,000 किसानों के ऋण खाता डिफाल्टर श्रेणी में गए।
. 40 करोड़ रुपये का कर्ज डिफाल्टर खातों में फंसा।

. 445 कर्जधारकों के रिकवरी प्रमाण पत्र जारी किए गए।
. 9,32,67,000 रुपये की वसूली बकाया भू-राजस्व की भांति कराई जा रही।

-
उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक की तरफ से सरकारी योजना को छोड़कर ऋण के रुपये पर 11.50 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज लिए जाने का प्रावधान है। लघु और सीमांत के साथ ही दीर्घ किसानों को भी 11.50 प्रतिशत ब्याज दर पर ही ऋण दिया जाता है। ऋण दिए जाने से पहले किसान की जांच-पड़ताल की जाती है और समय से किस्त अदायगी के लिए भी समझाया जाता है। किसान ऋण लेने के बाद अदायगी पर ध्यान नहीं देते हैं जिससे ऋण खाता डिफाल्टर श्रेणी में आ जाता है। किसानों को काली सूची में नहीं डाला गया है हां अधिक अवधि से ऋण अदायगी न करने वाले किसानों से वसूली के लिए बकाया भू-राजस्व की भांति कराए जाने के लिए रिकवरी प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। -महेश पाल गौतम, जिला आंकिक, उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें