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खादी, खाकी, कोट, माफिया, सबकी पक्की यारा है..

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हरदोई। मां आशा फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार की शाम को ऑनलाइन कवि संध्या का आयोजन हुआ। जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से खूब समां बांधा। कवि दीपक गोस्वामी ने खादी, खाकी, कोट, माफिया, सबकी पक्की यारी है को खूब सराहा।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत संडीला की कवयित्री प्रियंका द्विवेदी ने वंदना से की। रचनाकार मृत्युंजय देव शुक्ल ने समाज में बेटियों पर होते भेदभाव को अपनी कविता खुशियां बेटों पर न्योछावर बेटियां फेंकते शूलों में, सुत हॉस्टल में रहकर पढ़ते, जाती न सुता स्कूलों में सुनाकर सभी को सोचने को विवश कर दिया। बदायूं के रचनाकार अविजीत ने कोरोना ने कर दिया, जनजीवन बेहाल, हे प्रभु ऐसा कीजिये, जीवन हो खुशहाल...कविता पढ़ी जो काफी सराही गई। सवायजपुर के युवा कवि प्रखर पांडेय ने हड्डियों को तोड़-तोड़ देते शोण को निचोड़, शत्रुओं से मित्रता निभाना नहीं जानते...कविता पढ़कर वाहवाही लूटी। संचालक गोपाल ठहाका ने एक दिन हम जीतेंगे कोरोना से जंग, कविता पढ़ी। कवि दीपक गोस्वामी ने खादी, खाकी, कोट, माफिया, सबकी पक्की यारी है। निर्दोषों का रक्त बहा जो, सबकी भागीदारी है, कविता पढ़कर व्यवस्था पर तंज कसा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बरेली के कवि डॉ. शिवशंकर ने कहा कि जो कहें शुभ कहें, अन्यथा चुप रहें, भूल से भी कभी, हम अशुभ ना कहें गीत पढ़ समां बांधा। संस्थापक अजीत शुक्ल ने भारत भू पर नजर जो डाली, लेंगे छीन जमीन को। सबक सिखाना शुरू कर दिया मोदी जी ने चीन को, कविता पढ़ तालियां बटोरी। संयोजक आकाश सोमवंशी ने कवियों का आभार व्यक्त किया।
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