मेला श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित
रामलीला में रविवार को भरत विलाप की भावपूर्ण लीला ने लोगों को प्रभावित कर
दिया। आदि पात्रों के वेश में सजे कलाकारों ने श्रीराम का वनवास होने की
सूचना पाकर बिलखते भरत के चरित्र का चित्रण किया, जिसे देखकर लोगों की
अश्रुधारा भी बह निकली।
नुमाइश मेला में गोविंद गोपाल लीला संस्थान के
कलाकारों ने भरत विलाप की लीला का मंचन किया। कथा व्यास स्वामी विष्णु
कुमार दत्तात्रेय की संगीतमयी वाणी से चौपाइयां सुनकर कलाकारों ने वास्तविक
लीला का मंचन कर प्रभावित किया। शुरुआत वृंदावन से आए कलाकारोें
ने अनरथ अवध अरंभेऊ जबते, भरतहिं अशगुन होहिं तब ते चौपाई सुन कर की।
कलाकारों ने दिखाया कि भरत जी को अपने ननिहाल में कई प्रकार के अपशगुन होते
हैं, वह भोले नाथ से प्रार्थना करते हैं उसी समय दूत वहां पहुंचता है और
गुरु का संदेश सुनाता है जिसे सुनते ही भरत जी अयोध्या लौट आते हैं और माता
कैकेयी से हाल पूछते हैं।
माता कैकेयी से अपने लिए राजपाट और श्रीराम
के लिए वनवास की जानकारी पाकर उनको खरी खोटी सुनाकर मंथरा की भी दुर्गति
करते हैं। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा पाकर महाराज दशरथ की अंत्येष्टि करते हैं।
कथा व्यास मोहि राजु हठि देइ हहु जबहिं, रसा रसातल जाइहिं तबहि।
कलाकार
चौपाई पर मंचन करते हैं कि अयोध्या का राज वह नहीं करेंगे और यदि अयोध्या
का राज करेंगे तो पृथ्वी रसातल में पहुंच जाएगी। साथ ही वन में जाकर राम व
सीता को मनाकर लाने की इच्छा प्रकट करते हैं। कलाकारों ने राम व भरत मिलाप
की लीला का बड़ा ही भाव पूर्ण व वास्तविक मंचन कर लोगों को अभिभूत कर दिया।
इस दौरान राम प्रकाश शुक्ला, कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, राकेश गुप्ता,
वियोग चंद्र मिश्र, संत कुमार सिंह व प्रेम शंकर द्विवेदी मौजूद थे।