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भागवत कथा से पहले निकाली गई कलश यात्रा

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बावन। क्षेत्र के ग्राम लोनार में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ सोमवार को कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा व्यास अनूप ठाकुर महाराज द्वारा भागवत के महात्म की कथा सुनाई गई।
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श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा का पुष्प वर्षा कर जगह-जगह स्वागत किया गया। कथा व्यास अनूप ठाकुर महाराज ने कहा कि जो भागवत कथा है, साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है।
भागवत कथा कलिकाल में तीनों ताप का नाश करने वाली है। भक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाली है। कहा कि एक बार नारद ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई।
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नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है।
यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे, लेकिन बृज में प्रवेश करते ही दोनों अचेत हो गए। बूढे़ हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए। इसके बाद देवर्षि नारद ने चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुनाया, लेकिन वह नहीं जागे।
नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान-वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। मुनियों के बताने पर नारद ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया।
मुनि कथा व्यास और नारद जी मुख्य परीक्षित बने। इससे ज्ञान और वैराग्य प्रथम दिवस की ही कथा सुनकर जाग गए। आयोजक मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, सुखपाल सिंह राठौड़ बलराम सिंह राठौड़ समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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