हरदोई। प्रवासी श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा पर जिले के खंड विकास अधिकारियों की लापरवाही ने पानी फेर दिया। हाल ये है कि प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा के तहत 32000 से अधिक जॉबकार्ड तो बनाए गए, लेकिन इन्हें ऑनलाइन नहीं किया गया। नियमत : जॉबकार्ड को ऑनलाइन किए बिना मनरेगा से कार्य नहीं दिया जा सकता।
कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में गैर जनपदों और प्रदेशों में कार्य कर रहे लोग पैतृक गांवों को लौट आए थे। इन सभी को मनेरगा से रोजगार देने के निर्देश डीएम और सीडीओ ने जारी किए थे। साथ ही साथ नए जॉबकार्ड बनाने को भी कहा था। जिले के 19 विकास खंडों में इस दौरान बड़ी संख्या में जॉबकार्ड बनाए गए लेकिन 32,852 जॉब कार्ड ऑनलाइन किए ही नहीं गए। जॉबकार्ड श्रमिकों को थमा दिए गए लेकिन ब्योरा ऑनलाइन न होने से उन्हें काम ही नहीं मिल सका। मामला संज्ञान में आने पर मनरेगा के जिम्मेदारों की नींद उड़ी हुई है।
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जो जॉबकार्ड ऑनलाइन नहीं हुए हैं, उन्हें ऑनलाइन करने के निर्देश सभी खंड विकास अधिकारियों को जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि उक्त सभी जॉबकार्ड प्रवासी श्रमिकों के नहीं हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मनरेगा से कार्य करना चाहते थे और जॉबकार्ड बनवाया था, लेकिन ये लोग यहीं रह रहे थे।
मनरेगा से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जारी जॉबकार्डों को ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी मनरेगा के तहत सभी ब्लाकों में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों की है। ऐसे में जहां जहां भी जॉबकार्ड ऑनलाइन नहीं हुए हैं, वहां के कंप्यूटर ऑपरेटरों पर ही इसका ठीकरा फूटेगा।