सातवीं मोहर्रम के जुलूस में शामिल जरी व अलम।
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पिहानी (हरदोई)। इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की याद में रविवार को सातवीं मोहर्रम का जुलूस अपनी रिवायती शान के साथ उठाया गया। जुलूस में शामिल हजरत कासिम की शबीहे ताबूत, जरी, अलम और ताजिए को अकीदतमंदों ने बोसे दिए। जुलूस के दौरान मातमी अंजुमनों के सदस्यों ने छुरियों के मातम से अपने सीने लहूलहान कर शहीदे करबला हजरत कासिम को पुरसा पेश किया। रौजा गेट पर बच्चों ने कमा लगाकर शोहदा-ए- करबला का गम मनाया। जुलूस में महिला गमख्वारों ने भी उल्लेखनीय भागीदारी की।
करबला की जंग में इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम को सातवीं मोहर्रम के दिन शहीद कर दिया गया था। इसी की याद में प्रतिवर्ष शियाओं की ओर से पिहानी में यह जुलूस निकाला जाता है। अंजुमनों ने नौहाख्वानी के ज़रिए शहादत का गम ताज़ा किया- अल्लाह रे करबला में वह छोटे- छोटे बच्चे। पानी तो मांगते थे लेकिन मिला नहीं था। इक लाश ऐसी देखी जिस पर कफन नहीं था। और इक बेवतन को ऐसा लूटा है करबला में। दुनिया में घर किसी का ऐसा लुटा नहीं था।
सुबह जुलूस की शुरूआत इमामाबाड़ा मीरसराय से हुई। जुलूस में हजरत कासिम की शबीहे ताबूत, ज़री और अलम शामिल थे। जगह- जगह कयाम करता हुआ जुलूस परम्परागत रास्तों से दोपहर 2 बजे चौहट्टा चौराहा पहुंचा। 2:17 बजे मोहल्ला खुर्मुली से आए दूसरे जुलूस का मिलाप कराया गया। यहां नौजवानाें ने छुरियाें का मातम करते हुए अपने सीने लाल कर लिए।
नौहाख्वानी और सीनाजनी के बीच लब्बैक या हुसैन की दर्दनाक सदाओं के साथ जुलूस इस्लामगंज, यूसुफजई, नईबस्ती और कटराबाजार मोहल्लों से गुजरता हुआ सदर जहां रौजा गेट पहुंचा। रौजा गेट पर कयाम के बीच ही छिपीटोला और लोहानी से आए दो अन्य जुलूसों का मिलाप हुआ। यहां पर मासूम बच्चों को कमा (माथे पर चीरा) लगाकर गमे शहादते हुसैन मनाया गया। देर शाम को जुलूस लोहानी व मुरीदखानी मोहल्लों में कयाम पर था।