हरदोई। मेडिकल काॅलेज परिसर में गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए आईपीडी भवन तो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हो पा रहा है। दरअसल आईपीडी में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। विद्युतीकरण के लिए कार्यदायी संस्था का चयन तक अभी नहीं हो पाया है।
सभी प्रकार के गंभीर मरीजों का उपचार करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पुरानी बिल्डिंग के स्थान पर 180 बेड की नई इमारत बनवाई है। नवीन आईपीडी (अंत: रोगी विभाग) में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। करीब 45 करोड़ की लागत से बन रही इस इमारत में सर्जिकल, बर्न और मेडिकल मरीजों को भर्ती किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज में अभी तक 184 वार्डों की व्यवस्था है और नवीन इमारत के हैंडओवर होने से 180 वार्ड बढ़ जाने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
आईपीडी इमारत का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन वार्डों में अभी कई काम बाकी है। सबसे महत्वपूर्ण कार्य तो बिजली आपूर्ति का ही है, लेकिन इसी कार्य में हीलाहवाली हो रही है। शासन स्तर से कार्यदायी संस्था ही नामित नहीं हो पाई है, जबकि बजट की कमी भी आड़े आ रही है। बिजली फिटिंग व आपूर्ति के लिए दो संस्थाओं पर मंथन चल रहा है। जिस वजह से काम शुरु नहीं हुआ है।
वार्डों में अभी ऑक्सीजन की पाइप लाइन नहीं
हरदोई। मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने पर वैसे तो कंसंट्रेटर से ही काम चलाया जाता है, लेकिन कार्ययोजना में वार्ड के हर बेड पर ऑक्सीजन पाइप लाइन और उपकरण लगाया जाना शामिल है तो आईपीडी के वार्डों में अभी यह कार्य भी होना बाकी है, हालांकि यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है और उनके अभियंता ने आकर नापजोख की कार्रवाई कर ली, लेकिन काम अभी शुरु होना बाकी है।
एक ही वार्ड में भर्ती हाे रहे बर्न और सर्जिकल मरीज
हरदोई। आईपीडी भवन के हस्तातंरण न होने से मेडिकल काॅलेज के अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को एक ही वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। बर्न और सर्जिकल के रोगियों को पैथोलाॅजी के ऊपर बने वार्डों में भर्ती किया जाता हैै।
आईपीडी इमारत में वार्डों में बिजली का काम रह गया है। शासन को बजट की डिमांड भी भेजी गई है। कार्यदायी संस्था नामित होते ही काम शुरु हो जाएगा।
डाॅ. आर्य देश दीपक
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज